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April 15, 2026 9:51 pm

झारखंड शिक्षा सचिव के गलत फैसले से सहायक आचार्य के ST,SC,OBC अभ्यर्थी बेहाल

राहुल दास

पाकुड़(हिरणपुर):-झारखंड सरकार एवं शिक्षा सचिव के गलत फैसले से ST,SC,OBC के अभ्यर्थियों को मुख्य धारा से वंचित करने पर तुली है,जिससे वर्तमान में विज्ञापन संख्या 13/2023 के सहायक आचार्य भर्ती के विज्ञापन में साफ साफ शब्दों में लिखा गया है कि टेट एक अहर्ता है सहायक आचार्य की बहाली मुख्य परीक्षा के आधार पर होगी तथा जो अभ्यर्थी सामान्य कोटि के बराबर अंक हासिल करेंगे उसकी बहाली सामान्य कोटि में की जाएगी,और ये परीक्षा CBT आधारित होगी वो भी विभिन्न चरणों पर उसके बाद नॉर्मिलाइजेशन के तहत ही परीक्षार्थी सफल घोषित होंगे,जिसके चलते अभ्यर्थियों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी,इसका मुख्य कारण अभ्यर्थियों को 400 से 500 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देना पड़ा,क्योंकि ज्यादातर परीक्षाएं,जमशेदपुर,बोकारो,रांची एवं धनबाद में संचालित की गई थी।फिर भी झारखण्ड के युवा हार नहीं माने और कक्षा 6 से 8 के लिए चार पालियों में तो वहीं कक्षा 1 से 5 के तीन पालियों में कठिन स्तर के परीक्षा में भाग लेकर सफल हुए,जिसे JSSC के द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया तथा वैसे सफल अभ्यर्थियों का रिजल्ट प्रकाशित करते हुए जिला मुहैया भी कराया गया,परन्तु नियुक्ति से 24 घंटे पूर्व झारखंड के शिक्षा सचिव अपनी अफसर शाही दिखाते हुए राजस्थान के अभ्यर्थी के संदर्भ में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के प्रदीप कुमार का जजमेंट लगते हुए रिजल्ट को संशोधित करवाते हुए SC ,ST,OBC के सफल अभ्यर्थी को जेटेट में आरक्षित श्रेणी से उत्तीर्ण अभ्यर्थी को दोहरा लाभ बताते हुए बाहर कर दिए,जो घोर अन्याय है,इसके कारण प्रभावित SC,ST,OBC के अभ्यर्थी अपने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट में परिमल कुमार के जजमेंट का अवमानना लगाते हुए न्याय का गुहार लगाने गए हैं ,जिस जजमेंट में साफ साफ लिखा है कि बीच खेल में नियम बदला नहीं जा सकता है,जिसके तहत CTET साथियों को यह कहकर बाहर किया गया है कि मूल विज्ञापन में CTET को अभ्यर्थी नहीं बनाया गया था,जिस कारण उन साथियों को बाहर कर दिया गया, तो किस आधार पर जजमेंट की अवमानना करते हुए बीच खेल में प्रदीप कुमार जजमेंट लगाया गया है?
जबकि प्रदीप कुमार का जजमेंट झारखंड के अभ्यर्थी पर लागू ही नहीं हो सकता है,प्रदीप कुमार का जजमेंट दो राज्य से संबंधित अभ्यर्थी के लिए था और यहां तो सभी झारखंडी हैं,जिसका क्लियरिफिकेशन वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मार्च 2026 में महाराष्ट शिक्षक भर्ती पर कर दिए हैं,उसके बाद भी ये अफसर को ये ज्ञात नहीं हो रहा है और यहां के SC,ST,OBC के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय कर रहे हैं,मै मानता हूं कि शिक्षा सचिव प्रदीप कुमार के जजमेंट का सही से अध्ययन नहीं किए होंगे और झारखंड के अभ्यर्थी पर लागू कर दिए,परन्तु फिलहाल जो महाराष्ट्र के जजमेंट में तो क्लियर कर दिया गया है,अब तो आप इसे हटाकर प्रभावित SC,ST,OBC के अभ्यर्थियों के साथ न्याय कर सकते हैं जो बेवजह परेशान है और आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। आखिर क्या कसूर है इनका यही न कि ये SC,ST,OBC से आते हैं या फिर क्या कारण है जिसे अब तक नियुक्ति से बाहर रखा गया है।क्या इसीलिए यहां के युवा झारखंड के अबुआ सरकार को बनाई थी,आखिर कब यहां के SC,ST,OBC के अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा,कब यहां से अफसर शाही समाप्त होगी,आखिर कब तक।

एक पीड़ित अभ्यर्थी ओम प्रकाश भारती,झारखंड सहायक आचार्य

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