लेखक की कलम से
अंकित कुमार लाल
यह लिख रहा हूं क्योंकि मैंने दोनों दौर देखे हैं। जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी, तब रोजगार के अवसर बेहतर हुआ करते थे। युवाओं को नौकरी के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता था। आमदनी भले बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन घरों में सुख-शांति और संतोष था। रुपयों की कीमत थी, उसका महत्व था।
उस समय अर्थव्यवस्था विकास की ओर बढ़ रही थी और आम परिवारों को स्थिरता महसूस होती थी। लोगों के बीच आपसी विश्वास था और आर्थिक संतुलन बना हुआ था।
आज जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार का दौर है, तो कई युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। महंगाई ऊंचे स्तर पर है, आमदनी सीमित है और खर्च बढ़ते जा रहे हैं। लोग आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि जिन परिवारों के घरों में रोजगार और स्थिरता कांग्रेस शासन में आई, उसी पीढ़ी के लोग आज कांग्रेस की आलोचना करते नजर आते हैं। यह सोचने वाली बात है कि आखिर ऐसा बदलाव क्यों आया।
यह लेख किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि बदलते हालात और अनुभवों को सामने रखने का प्रयास है।





