अक्षय कुमार
मांडू। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, जागरूकता तथा संवाद को केंद्र में रखते हुए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक भूमिका को मजबूत बनाना तथा उन्हें कृषि एवं आजीविका से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना रहा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मांडू शैलवाला का आगमन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक प्रतिनिधि एवं उपमुखिया, मांडू पंकज गुप्ता ने भी महिलाओं की भूमिका को समाज की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी जितनी मजबूत होगी, उतनी ही तेजी से समाज आगे बढ़ेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ के केन्द्राध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विषय “देने से ही पाने का मार्ग” है, जो समाज के लिए एक गहरा संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जब हम समाज को ज्ञान, अवसर, सहयोग और विश्वास देते हैं, तभी उसके बदले में हमें विकास, समृद्धि और सामाजिक प्रगति प्राप्त होती है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि महिलाओं को शिक्षा, तकनीक, संसाधन और अवसर प्रदान किए जाएँ, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं बल्कि पूरे परिवार, गाँव और समाज के विकास की दिशा को भी बदल देती हैं।

डॉ. शेखर ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन, सब्जी उत्पादन, बकरी पालन, सूकर पालन, वर्मी कम्पोस्ट तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाएँ आय के नए स्रोत विकसित कर सकें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इन्द्रजीत ने किया। उन्होंने महिलाओं को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नई वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक सेविका, सहायिका एवं ग्रामीण महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. धर्मजीत खेरवार एवं शशिकांत चौबे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





