मेदनीनगर: आज का युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर बड़े-बड़े पदों तक पहुंच रहा है, लेकिन कई बार व्यवहार में वह बुनियादी अनुशासन तक भूल जाता है। बचपन से सिखाया जाता है कि कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहां विशेष मर्यादा और अनुशासन का पालन जरूरी होता है—चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो या श्मशान घाट।
हाल ही में श्मशान घाट पर देखने को मिला कि जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चलती है, उसी गेट के सामने एक वाहन खड़ा कर दिया गया। जबकि वहां पार्किंग की अलग व्यवस्था मौजूद है। यह वही स्थान है जहां लोग बैठकर अंतिम संस्कार से जुड़े कर्मकांड करते हैं और अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देते हैं।
जब वाहन खड़ा करने वाले से पूछा गया कि यहां वाहन लगाने का क्या कारण है, तो जवाब मिला—“हम लोग भले ही दूसरे धर्म के हैं, लेकिन यहां आने वाले लोगों की मदद करते हैं। जरूरत होगी तो गाड़ी हटा देंगे, अभी यहीं खड़ी रहेगी।”
इस बीच जब श्मशान की व्यवस्था देखने वाले से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जानकारी ली कि गाड़ी किसकी है। वहां मौजूद वह व्यक्ति ने बताया कि वाहन मोनू पहाड़ी का है बता दीजिए।
घटना के दौरान मौजूद एक रिपोर्टर ने भी सवाल उठाया कि क्या नियम और कानून सबके लिए समान होते हैं? क्या शिक्षा केवल पैसा कमाने का साधन बनकर रह गई है, या फिर उसका उद्देश्य जीवन में अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाना है?
सवाल छोटा है, लेकिन सोचने लायक है—
क्या पढ़ाई हमें केवल डिग्री देती है, या फिर हमें इंसान बनना भी सिखाती है?





