उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में माननीय उच्च न्यायालय में लंबित वादों की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विधि शाखा द्वारा विभागवार उन लंबित मामलों की सूची प्रस्तुत की गई, जिनमें अब तक सरकार की ओर से प्रतिशपथ पत्र/कारण पृच्छा (काउंटर एफिडेविट) दायर किया जाना लंबित है। बैठक के दौरान उपायुक्त ने माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की विभागवार विस्तृत समीक्षा की तथा ऐसे मामलों की विशेष रूप से जांच की, जिनमें अभी तक सरकार का पक्ष रखते हुए प्रतिशपथ पत्र/कारण पृच्छा दायर नहीं किया गया है। समीक्षा के उपरांत उन्होंने संबंधित विभागों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक दिशा- निर्देश दिए। उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे लंबित वादों में प्रतिशपथ पत्र दायर करने की कार्रवाई एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करें, ताकि न्यायालय में सरकार का पक्ष समय पर प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि तथ्य विवरणी के अनुमोदन के क्रम में सभी संबंधित पदाधिकारी याचिका में उठाए गए बिंदुओं के अनुरूप कंडिकावार तैयार तथ्य विवरणी की भली-भांति समीक्षा कर लें और यह सुनिश्चित करें कि सभी तथ्यों का समुचित एवं सटीक उल्लेख किया गया है। इसके पश्चात ही तथ्य विवरणी का अनुमोदन करते हुए उसे उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उपायुक्त ने आगे कहा कि प्रतिशपथ पत्र दायर किए जाने के उपरांत माननीय न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। यदि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में विलंब के कारण अवमानना वाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसके लिए संबंधित पदाधिकारी/कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में जिला विधि शाखा के पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।




