जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
पलामू (चैनपुर): समय ऐसा हुआ करता था जब लोग अपनी जमीन को भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा मानते थे। कहा जाता था कि यदि जीवन में कुछ न भी रहे, तो जमीन बुरे वक्त में सहारा बन जाती है। लेकिन आज हालात ऐसे बनते दिखाई दे रहे हैं कि जमीन ही लोगों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।
ऐसा ही एक मामला नरसिंहपुर पथरा गांव से जुड़ा बताया जा रहा है, जो संयोग से वर्तमान विधायक का भी गांव है और इसके पास ही चैनपुर प्रखंड एवं अंचल कार्यालय पड़ता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां की कुछ जमीनों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा यह भी है कि जिस भूमि का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जाता है, उसी भूमि के लेन-देन की तैयारी की बातें सामने आ रही हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है तो यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। आरोपों की चर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों का दबदबा इस पूरे मामले में देखने को मिल रहा है, जो अपने हित के लिए जमीनों का खेल खेलने की कोशिश कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित बताया जा रहा है, तब किसी भी प्रकार का भूमि लेन-देन या तैयारी कैसे संभव हो सकती है। यदि इसमें सच्चाई है तो यह सीधे-सीधे न्याय व्यवस्था को चुनौती देने जैसा प्रतीत होता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि नरसिंहपुर पथरा वही गांव है जहां से वर्तमान विधायक का संबंध बताया जाता है। आमतौर पर उनके नाम के साथ क्षेत्र में शांति और बेहतर माहौल की चर्चा होती रही है, लेकिन उसी गांव में भूमि विवाद और अशांति की खबरें उठना कई सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते इसकी जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि जमीन और कानून के सम्मान पर भी बड़ी बहस खड़ी कर सकता है।






