पाकुड़िया। रामलला यज्ञ मैदान पाकुड़िया में विगत नौ दिनों से चल रहे श्री श्री 1008 श्री बिष्णु महायज्ञ का समापन रविवार को पूर्णाहुति के साथ उल्लासपूर्ण माहौल में सम्पन्न हो गया। पूरे यज्ञ के दौरान क्षेत्र में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यज्ञ का शुभारंभ 21 मार्च को 2100 कन्याओं एवं महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ था। समापन दिवस पर पूर्णाहुति से पूर्व सार्वजनिक सामूहिक यज्ञाहुति दी गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके उपरांत यजमान शंभु कुमार भगत ने सपत्नीक 51 कुआंरी कन्याओं एवं ब्राह्मणों का विधिवत भोज कराया।
इस महायज्ञ का संचालन बनारस से आए 11 विद्वान पंडितों के निर्देशन में संपन्न हुआ। अंतिम दिन यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन करते हुए यज्ञ मंडप की परिक्रमा की और स्थापित देवी-देवताओं का विधिपूर्वक दर्शन-पूजन किया। नौ दिनों तक चले अखंड हरिनाम संकीर्तन का भी पूर्णाहुति के साथ समापन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिदिन संध्या आरती एवं भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। यज्ञ स्थल पर नौ दिनों तक महाभंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही संध्या आरती के बाद नियमित रूप से प्रसाद वितरण भी किया गया। यज्ञ के दौरान प्रत्येक रात्रि विभिन्न ख्याति प्राप्त कथाकारों एवं कलाकारों द्वारा संगीतमय प्रवचन प्रस्तुत किए गए, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। विशेष रूप से आठवें दिन शनिवार की रात आयोजित बाउल संगीत सह भजन संध्या कार्यक्रम ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बंगाल से आए सुप्रसिद्ध कलाकारों ने पारंपरिक बाउल गायन की प्रस्तुति देकर माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया, जिसे सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
इस महायज्ञ को सफल बनाने में यज्ञ समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं पूरे आयोजन के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की सतत तैनाती रही। आयोजन में न केवल पाकुड़िया प्रखंड बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। गौरतलब है कि पाकुड़िया में विष्णु महायज्ञ की परंपरा वर्ष 2002 में बनारस के यशस्वी संत बैरागी बाबा एवं उनके शिष्य, पाकुड़िया निवासी पूर्व मुखिया शिवशंकर भगत द्वारा शुरू की गई थी। कोरोना काल के दौरान यह आयोजन कुछ समय के लिए स्थगित रहा, लेकिन इस वर्ष युवाओं की पहल से पुनः इसकी भव्य शुरुआत हुई और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।








