खजाना भरा, फिर भी सड़कें लाचार—जिले की बदहाली ने खोली सिस्टम की पोल।
गड्ढों में फंसा विकास, हादसों के साए में सफर—जिम्मेदारों पर जनता का सीधा प्रहार।
पाकुड़: खनन के दम पर रिकॉर्ड राजस्व अर्जित करने वाला पाकुड़ जिला आज अपनी जर्जर सड़कों के कारण कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। एक ओर जहां जिले ने इस वित्तीय वर्ष में आय के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की हालत बद से बदतर होती जा रही है। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) में करोड़ों रुपये जमा होने के बावजूद सड़क जैसी प्राथमिक जरूरत अब भी उपेक्षा की शिकार है।जिले की सड़कों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के बीच यह कहावत आम हो गई है—“सड़क में गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़क नजर आती है।” जगह-जगह बने गहरे गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। बाइक सवारों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है, जबकि भारी वाहन भी किसी तरह गुजरने को मजबूर हैं। खराब पड़े वाहनों का सड़क किनारे खड़ा होना अब आम दृश्य बन गया है।पाकुड़ के लगभग सभी प्रखंडों में यही हालात देखने को मिल रहे हैं। खराब सड़कों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिले में फंड की कोई कमी नहीं है, तो सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। DMFT फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।सरकार, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका अब सीधे निशाने पर है। सत्ता पक्ष के सांसद और विधायक होने के बावजूद हालात में सुधार नहीं होना लोगों की नाराजगी को और बढ़ा रहा है। स्थानीय लोग इसे जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही का परिणाम मान रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होती हैं। बेहतर सड़कें ही व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को गति देती हैं। ऐसे में संसाधनों से भरपूर पाकुड़ में सड़कों की बदहाली विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।अब जरूरत है कि जिला प्रशासन DMFT फंड के उपयोग में पारदर्शिता लाए और सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता में शामिल करे, ताकि जनता को राहत मिल सके और विकास जमीनी स्तर पर नजर आए।






