प्रवाह संस्था और एसबीआई फाउंडेशन की पहल से किसान अपनाने लगे टिकाऊ खेती, हाट में मिल रहा बेहतर दाम।
इकबाल हुसैन
पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत पथरादाहा गांव में जैविक खेती किसानों के लिए बदलाव की नई राह बन रही है। प्रवाह संस्था और SBI फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ग्राम सेवा कार्यक्रम के तहत यहां के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। संस्था के सचिव दिलीप कुमार ने बताया कि किसानों को जैविक और रेजिलिएंट खेती के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मचान विधि (ट्रेलिस फार्मिंग) को अपनाने से करेला और खीरा जैसी फसलों की खेती में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। गांव के प्रगतिशील किसान ठाकुर हेम्ब्रम और सुरुधनी मरांडी ने बताया कि मचान विधि से उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़े हैं। स्थानीय हाट में खीरा 30 रुपये प्रति किलो और करेला 40 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। ठाकुर हेम्ब्रम अब तक 1180 रुपये और सुरुधनी मरांडी 1240 रुपये की सब्जियां बेच चुके हैं, जिससे उनकी आमदनी में सीधा इजाफा हुआ है।
जैविक खेती के जरिए किसान न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं। रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों के इस्तेमाल से जमीन की उर्वरता भी बनी हुई है।
पथरादाहा गांव में यह पहल आज बेहतर आजीविका और सतत विकास का मजबूत उदाहरण बन चुकी है। इससे प्रेरित होकर आसपास के किसान भी जैविक खेती अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। ग्राम सेवा कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।







