अधर में लटका 4 किमी सड़क का निर्माण,हर दिन मौत को चुनौती देकर पुल पार कर रहे लोग
नेताओं ने फीता काटा, जनता अब जान बचाकर रास्ता काट रही है
शिलान्यास हुआ, पैसा खर्च हुआ… फिर सड़क अधूरी क्यों?: ग्रामीण
सतनाम सिंह
पाकुड़: भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का एक भयावह चेहरा पाकुड़ जिले में देखने को मिल रहा है। पाकुड़ सदर प्रखंड में चेंगाडांगा से हमरूल (पश्चिम बंगाल सीमा) तक जाने वाली लगभग 4.178 किलोमीटर लंबी महत्वपूर्ण सड़क आज बदहाली के आंसू रो रही है। आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है, जो अब ग्रामीणों के लिए “डेथ ट्रैप” (मौत का जाल) बन चुका है।

उद्घाटन के बाद भी काम अधूरा
7 मार्च 2023 को बड़े तामझाम के साथ इस सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया गया था। इस योजना की पट्टिका पर मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम (जो फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में हैं) ने शिलान्यास किया था। लेकिन शिलान्यास के सालों बाद भी जमीनी हकीकत इसके उलट है।

ठेकेदारी का खेल और अधूरा पुल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस सड़क का टेंडर पहले एक अन्य ठेकेदार को मिला था, जिनकी मृत्यु के बाद कार्य रुक गया। बाद में इसका ‘री-टेंडर’ हुआ। आरोप है कि वर्तमान में इस सड़क के निर्माण का जिम्मा कांग्रेस नेता नूरजमान शेख के पास है, लेकिन काम की गति शून्य है।सड़क के बीचों-बीच बने पुल की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पुल को जोड़ने वाली सड़क का एक बड़ा हिस्सा ढह चुका है और सड़क का संपर्क कटा हुआ है। रात के अंधेरे में यहाँ किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
ग्रामीणों में दिखा भारी रोष

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत के कारण काम रुका हुआ है। झामुमो के स्थानीय नेता सह ग्रामीण अली अकबर ने कहा कि ठेकेदार चैन की नींद सो रहे हैं और हम अपनी जान हथेली पर लेकर सफर कर रहे हैं। पुल की स्थिति इतनी जर्जर है कि यह कभी भी पूरी तरह गिर सकता है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? वहीं ग्रामीण आजफारूल इस्लाम ने बताया कि “ग्रामीण इलाकों में विकास के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगा दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी काम अधूरा छोड़ दिया जाता है। यह सड़क पाकुड़ और बंगाल सीमा के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पुल से सड़क का सम्पर्क टूटने से मरीजों, छात्रों और किसानों को भारी परेशानी हो रही है। ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
पथ निर्माण विभाग, पाकुड़ प्रमंडल की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। जब योजना का बजट पास है और टेंडर आवंटित हो चुका है, तो काम अधूरा क्यों छोड़ा गया? क्या सत्ता से जुड़े ठेकेदार होने के कारण विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है?ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पुल की मरम्मत और सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और जिला मुख्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।








