पाकुड़: गंगा पर बने बिहार के महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग विक्रमशिला सेतु के बंद होने का असर अब झारखंड के पाकुड़ जिले के पत्थर उद्योग पर साफ दिखने लगा है। पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन द्वारा यातायात रोक दिए जाने से पाकुड़ से बिहार जाने वाली सप्लाई चेन लगभग चरमरा गई है। रोजाना सैकड़ों ट्रकों से होने वाली पत्थर आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि वैकल्पिक मार्ग से बढ़ी दूरी ने ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। पाकुड़ के खनन क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में स्टोन चिप्स और बोल्डर बिहार के भागलपुर, नवगछिया, सहरसा, पूर्णिया समेत कई जिलों में भेजे जाते थे। इनमें से अधिकांश वाहन विक्रमशिला सेतु के रास्ते गुजरते थे। लेकिन पुल बंद होने के बाद अब ट्रकों को मुंगेर के रास्ते लंबा डायवर्जन लेना पड़ रहा है। इससे परिवहन में न केवल समय बढ़ा है, बल्कि डीजल और अन्य परिचालन खर्च भी काफी बढ़ गए हैं।
व्यवसायियों के अनुसार, पहले जिस दूरी को ट्रक कम समय में तय कर लेते थे, अब उसी रूट पर करीब 100 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बढ़ी लागत के अनुपात में भाड़ा नहीं बढ़ा है। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों को सीधे घाटे में काम करना पड़ रहा है।
रोजाना सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही प्रभावित।
जानकारी के मुताबिक, पाकुड़ जिले से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक बिहार के विभिन्न इलाकों के लिए रवाना होते थे। पुल बंद होने के बाद इस संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई क्रशर और स्टोन यार्ड में लोडिंग धीमी पड़ गई है, जबकि कुछ स्थानों पर काम लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है।
खरीदारों ने भी बनाई दूरी
व्यवसायियों का कहना है कि लंबी दूरी और अनिश्चित डिलीवरी के कारण बिहार के कई खरीदार अब वैकल्पिक बाजार तलाशने लगे हैं। इससे पाकुड़ के पत्थर की मांग प्रभावित हो रही है। कारोबारियों को आशंका है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो पत्थर उद्योग का करीब आधा कारोबार प्रभावित हो सकता है।
खनन क्षेत्र से लेकर ट्रांसपोर्ट तक असर
विक्रमशिला सेतु बंद होने का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर, खनन मजदूर और लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़े हजारों लोगों की आय पर भी असर पड़ रहा है। समय पर माल नहीं पहुंचने से ठेकेदारों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है, जबकि कई ट्रक अब कम फेरे लगा पा रहे हैं।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो संकट गहरा सकता है।
स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि पुल बंद रहने से दक्षिण बिहार की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई है और इसका सबसे बड़ा असर पाकुड़ के पत्थर उद्योग पर पड़ रहा है। उनका मानना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था या पुल की मरम्मत नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में उद्योग को और बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।






