ग्रामीण क्षेत्रों व बंदियों को बाल श्रम, दहेज व डायन प्रथा पर दी गई विस्तृत जानकारी, निःशुल्क विधिक सहायता की भी दी जानकारी
पाकुड़। झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में जिलेभर में नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा प्रभारी सचिव विशाल मांझी के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। अभियान के तहत पाकुड़ मंडल कारा सहित पाकुड़, पाकुड़िया, महेशपुर, हिरणपुर और अमड़ापाड़ा प्रखंडों के ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों—शहरकोल, पाडेरकोला, डोमनगड़िया, डांगापाड़ा, जीतको और सिंदरी बामनीपहाड़ सहित कई पंचायतों में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स द्वारा लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई। पीएलवी चंदन कुमार रविदास ने बाल श्रम के दुष्परिणामों पर जानकारी देते हुए बताया कि कम उम्र के बच्चों से उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करने वाले कार्य करवाना बाल श्रम की श्रेणी में आता है, जो कानूनन दंडनीय है। वहीं पीएलवी मल्लिका सरकार ने दहेज प्रथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सामाजिक कुप्रथा घरेलू हिंसा, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का प्रमुख कारण बनती है।
पीएलवी सौरभ कुमार यादव ने डायन प्रथा को अंधविश्वास पर आधारित सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि इसके कारण महिलाओं को प्रताड़ना, सामाजिक बहिष्कार और कई मामलों में हिंसा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से ही इस कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है। मंडल कारा पाकुड़ में आयोजित विशेष सत्र के दौरान लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल तथा पैनल अधिवक्ता अजय कुमार सौरभ ने बंदियों को कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जेल अनुशासन, कानूनी विवादों से बचाव तथा रिहाई के बाद समाज में सकारात्मक जीवन अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम में निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी अधिकारों और डालसा द्वारा उपलब्ध सेवाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर पीएलवी मोकमाउल शेख, सुजाता घोष सहित अन्य कर्मी उपस्थित रहे।







