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June 19, 2026 1:31 am

धर्म और मानवता की रक्षा के लिए गुरु अर्जन देव जी की महान शहादत को किया याद, पाकुड़ गुरुद्वारे में श्रद्धा के साथ मनाया गया शहीदी दिवस

पाकुड़। सिखों के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस गुरुवार को पाकुड़ साध संगत गुरुद्वारे में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सिख, सिंधी समाज सहित विभिन्न समाज के लोगों ने गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका और गुरु अर्जन देव जी की महान शहादत को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह से गुरुद्वारे में कीर्तन और पाठ से हुई। गुरुद्वारा के मुख्य पाठी भाई नवनीत सिंह ने शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कीर्तन के बाद अरदास की गई और श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
गुरु अर्जन देव जी सिख धर्म के पांचवें गुरु थे और उन्हें सिख इतिहास का पहला शहीद गुरु माना जाता है। वर्ष 1606 में उन्होंने धर्म, सत्य, मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। उन्होंने अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपने सिद्धांतों और सत्य के मार्ग को चुना। उनकी शहादत ने सिख समाज में त्याग, साहस और मानव सेवा की भावना को मजबूत किया। गुरु अर्जन देव जी के नेतृत्व में हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) का निर्माण पूरा हुआ और उन्होंने आदि ग्रंथ के संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी शिक्षाएं आज भी मानवता, समानता और सेवा का संदेश देती हैं। शहीदी दिवस के अवसर पर सिख समाज की ओर से ठंडे शरबत का वितरण भी किया गया। मान्यता है कि गुरु अर्जन देव जी की शहादत के समय भीषण गर्मी थी, जिसके बाद उनकी याद में गर्मी के दिनों में शरबत वितरण की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है। समाज के लोगों ने शहर के मुख्य मार्ग पर स्टॉल लगाकर राहगीरों और आम लोगों को ठंडा शरबत पिलाया। गुरुद्वारा के मुख्य कार्यकारणी सचिव एवं कोषाध्यक्ष कुलदीप सिंह, भाई नवनीत सिंह एवं सिख समुदाय की महिलाओं ने बताया कि हर वर्ष गुरु अर्जन देव जी की शहादत को याद करते हुए कीर्तन, पाठ, अरदास, लंगर और शरबत वितरण का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि गुरु जी की कुर्बानी हमें हमेशा सत्य, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे पहुंचकर गुरु अर्जन देव जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनकी महान शहादत को नमन किया।

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