276 में 276 छात्र सफल, प्रधानाध्यापक शमशेर की भूमिका रही निर्णायक
हर छात्र को दिया व्यक्तिगत ध्यान, इसलिए आया बेहतर परिणाम– शमशेर
सुमी मंडल की सफलता पूरे विद्यालय के लिए गर्व की बात: शमशेर
पाकुड़: मैट्रिक परीक्षा परिणाम में पाकुड़ के उत्क्रमित उच्च विद्यालय नबीनगर ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 प्रतिशत रिजल्ट हासिल किया है।वर्ष 2026 में विद्यालय के सभी 276 विद्यार्थी परीक्षा में सफल रहे। खास बात यह है कि विद्यालय ने लगातार चौथे वर्ष—2023, 2024, 2025 और 2026—में शत-प्रतिशत परिणाम देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।इस वर्ष के परिणाम में 116 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी, 146 ने द्वितीय श्रेणी और 14 विद्यार्थियों ने तृतीय श्रेणी प्राप्त की है।यह उपलब्धि विद्यालय में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और बेहतर मार्गदर्शन को दर्शाती है।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची सुमी मंडल
विद्यालय की छात्रा सुमी मंडल ने टॉप-10 में स्थान बनाकर विशेष उपलब्धि हासिल की है। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाली सुमी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। उनके पिता गेंदा मंडल हैं।सुमी मंडल ने अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य सिविल सर्विस में जाकर देश की सेवा करना है। उन्होंने इसे अपने जीवन की पहली बड़ी उपलब्धि बताते हुए आगे और कड़ी मेहनत करने की बात कही।
प्रधानाध्यापक शमशेर की रही अहम भूमिका
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्रधानाध्यापक शमशेर आलम की अहम भूमिका मानी जा रही है। उनके नेतृत्व, अनुशासन और सतत निगरानी ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नियमित मूल्यांकन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर विशेष जोर दिया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।विद्यालय ने वर्ष 2021 में जिला टॉपर देकर अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता का परिचय दिया था। लगातार बेहतर परिणामों की परंपरा ने इसे क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल कर दिया है।
शिक्षकों की मेहनत रंग लाई
विद्यालय के शिक्षक—विजय कुमार राय, आशिकुल शेख, जेम्स सोरेन, शरीफ इकबाल, संतोवना मुर्मू, देबनाथ दास, मैथुज मरांडी और अमीना खातून—की कड़ी मेहनत और समर्पण भी इस सफलता की मजबूत कड़ी रही।विद्यालय की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने कहा यह सफलता हमारे सभी विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है।लगातार चार वर्षों तक 100 प्रतिशत रिजल्ट हासिल करना आसान नहीं होता, लेकिन हमारी टीम ने इसे संभव कर दिखाया है। हमने पढ़ाई के साथ-साथ नियमित मूल्यांकन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया। खास तौर पर कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त फोकस किया गया, जिससे वे भी बेहतर प्रदर्शन कर सके।सुमी मंडल जैसी छात्राओं की सफलता हमारे लिए गर्व की बात है।सीमित संसाधनों के बावजूद उसने जो उपलब्धि हासिल की है, वह अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। हमारा प्रयास आगे भी इसी तरह बेहतर परिणाम देने और बच्चों के भविष्य को संवारने का रहेगा।








