पाकुड़: खरीफ मौसम में बेहतर उत्पादन और बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का संदेश देते हुए शनिवार को संयुक्त कृषि भवन, पाकुड़ में कृषि प्रसार योजना (कृषिन्नोति) के तहत कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) द्वारा एक दिवसीय कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक आत्मा मृत्युंजय कुमार एवं उप परियोजना निदेशक आत्मा चन्द्रमौली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गोष्ठी में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए करीब 85 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने किसानों से खरीफ फसलों की वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील करते हुए प्रमाणित बीजों के उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा मौसम के अनुरूप खेती करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए कम अवधि एवं सूखा-सहिष्णु फसलों की खेती, समय पर बुआई और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की सलाह दी। उप परियोजना निदेशक आत्मा चन्द्रमौली ने किसानों को आत्मा की विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण, कृषक परिभ्रमण, फसल प्रदर्शन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देते हुए इनका अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने से उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ विवेक कुमार एवं सीमांत चौरसिया ने मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, उन्नत किस्मों के चयन, फसल विविधीकरण, पौध संरक्षण और जल प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। किसानों को स्थानीय जलवायु और मौसम पूर्वानुमान के अनुरूप खेती की योजना बनाने की सलाह दी गई, ताकि प्राकृतिक जोखिम कम होने के साथ बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी समस्याएं और अपने अनुभव साझा किए, जिनका विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान बताया। अंत में किसानों ने ऐसी तकनीकी गोष्ठियों को खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में उपयोगी बताते हुए इनके नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।







