कोलकाता/पाकुड़: रेलवे ट्रैक पार कर कुछ सेकेंड बचाने की कोशिश हजारों लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। पूर्व रेलवे ने ट्रैक पर अनधिकृत रूप से पार करने (ट्रेसपासिंग) की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए लोगों से फुट ओवरब्रिज (एफओबी) और सबवे का ही इस्तेमाल करने की अपील की है।
पूर्व रेलवे की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में ट्रैक ट्रेसपासिंग की 2,394 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 2,038 लोगों की मौत हो गई, जबकि 359 लोग घायल हुए। वहीं, जनवरी से जून 2026 तक ही 1,144 घटनाओं में 1,001 लोगों की जान चली गई और 147 लोग घायल हुए। सबसे अधिक मामले सियालदह और हावड़ा मंडल में सामने आए हैं।
रेलवे के अनुसार, वर्ष 2025 में सियालदह मंडल में 1,108 और हावड़ा मंडल में 745 ट्रेसपासिंग की घटनाएं दर्ज हुईं। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भी सियालदह में 529 और हावड़ा में 348 घटनाएं दर्ज की गई हैं। आसनसोल और मालदा मंडल भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के निर्देश पर पूरे जोन में जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है और यात्रियों को लगातार ट्रैक पार न करने की सलाह दी जा रही है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत ट्रैक या प्रतिबंधित रेलवे क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश दंडनीय अपराध है। नियम उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, कारावास या दोनों का प्रावधान है। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि रेलवे ट्रैक पर खोया गया हर जीवन एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने लोगों से कुछ सेकेंड बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालने तथा ट्रैक पार करने के लिए हमेशा फुट ओवरब्रिज या सबवे का ही उपयोग करने की अपील की।





