न्यास परिषद की बैठक: खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए योजनाओं पर मंथन, स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर भी जोर।
पाकुड़। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक हुई। उपायुक्त सह न्यास परिषद की अध्यक्ष मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, कौशल विकास, सौर ऊर्जा और आंगनबाड़ी सुविधाओं से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में तय किया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में डीएमएफटी की 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं पर खर्च होगी। इसमें पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं 30 प्रतिशत राशि आधारभूत संरचना के विकास पर खर्च होगी। इसके तहत सड़क, पुल-पुलिया और सिंचाई जैसी योजनाएं शामिल होंगी।
स्थानीय उपज से रोजगार बढ़ाने की तैयारी
बैठक में सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। जेएसएलपीएस की दीदियों और उद्यमी दीदियों को सहयोग देने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई। पटसन, कचु, महुआ और चिरौता जैसी स्थानीय उपज के व्यवसाय व प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना पर भी मंथन हुआ।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का चयन जनहित, वास्तविक जरूरत और खनन प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ समय पर काम पूरा करने पर भी जोर दिया। बैठक में सांसद विजय कुमार हांसदा, विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी, विधायक हेमलाल मुर्मू, विधायक निसात आलम, डीडीसी अरविंद कुमार लाल, एसडीओ साईमन मरांडी समेत जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।





