स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा, पेयजल से लेकर बाल अधिकार तक पर मांगे गए सुझाव; GPDP 2026-27 में शामिल होंगी स्थानीय प्राथमिकताएं
पाकुड़। अब गांव की विकास योजना सिर्फ पंचायत स्तर पर तय नहीं होगी, बल्कि इसमें महिलाओं और बच्चों की जरूरतों और समस्याओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) 2026-27 को सहभागी और समावेशी बनाने के लिए मंगलवार को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में महिला सभा और बाल सभा आयोजित की गई। सभाओं में महिलाओं और बच्चों ने गांव की समस्याओं के साथ विकास से जुड़ी अपनी प्राथमिकताएं और सुझाव सामने रखे।
महिला सभा में स्वास्थ्य से आजीविका तक मुद्दे उठे
महिला सभाओं में स्वास्थ्य एवं पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, शिक्षा, आजीविका और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रभावी बनाने को लेकर भी महिलाओं ने सुझाव दिए। पंचायत स्तर पर प्राप्त सुझावों को संकलित कर GPDP में शामिल किया जाएगा।
बाल सभा में बच्चों ने बताई अपनी जरूरतें।
बाल सभा में बच्चों को भी अपनी बात रखने का मौका मिला। विद्यालय में नियमित उपस्थिति, ड्रॉपआउट रोकने, बाल अधिकार, पोषण, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, खेलकूद और विद्यालय-अंगनबाड़ी की सुविधाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बच्चों ने सुरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण को लेकर अपनी अपेक्षाएं रखीं।
कमजोर और वंचित वर्गों की भागीदारी पर जोर
प्रशासन का उद्देश्य पंचायत की विकास योजना को स्थानीय जरूरतों और वास्तविक समस्याओं पर आधारित बनाना है। महिला और बाल सभा से मिले सुझावों को पंचायत स्तर पर संकलित कर विकास योजना में शामिल किया जा रहा है। प्रशासन ने पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, शिक्षकों और ग्रामीणों से GPDP निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
योजना से आगे सहभागी विकास की पहल
महिला और बाल सभा को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर पंचायत स्तर पर सहभागी और समावेशी विकास को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन वर्गों की आवाज भी विकास योजना तक पहुंचेगी, जिनकी जरूरतें कई बार योजना निर्माण में पीछे छूट जाती हैं।








