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November 7, 2026 11:52 pm

1737 से तांत्रिक परंपरा के साथ हो रही मां नित्य काली की पूजा, तारापीठ से भी जुड़ी है आध्यात्मिक मान्यता

राजा पृथ्वीचंद्र शाही ने कराया था ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण, बामाखेपा ने तीन दिनों तक की थी साधना।

झारखंड, बिहार और बंगाल से पहुंचते हैं श्रद्धालु।

पाकुड़। शहर के राजा पाड़ा स्थित प्रसिद्ध नित्य काली मंदिर में करीब 300 वर्षों से तांत्रिक विधि-विधान के साथ मां काली की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 1737 में राजा पृथ्वीचंद्र शाही द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक मंदिर की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान आज भी कायम है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां काली अवश्य पूरी करती हैं। यही आस्था श्रद्धालुओं को दूर-दराज के क्षेत्रों से मंदिर तक खींच लाती है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, निर्माण के बाद मां काली के परम भक्त और प्रसिद्ध साधक बामाखेपा ने यहां तीन दिनों तक साधना की थी। तभी से मंदिर की तांत्रिक परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, जबकि प्रत्येक शनिवार, मंगलवार और काली पूजा के अवसर पर विशेष तांत्रिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी चिरंजीवी मिश्रा के अनुसार, पाकुड़ के नित्य काली मंदिर और पश्चिम बंगाल के तारापीठ के बीच विशेष आध्यात्मिक संबंध की मान्यता है। करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही पूजा-पद्धति आज भी पारंपरिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। स्थानीय मनोज बताते हैं कि नित्य काली मंदिर पाकुड़ की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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