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May 13, 2026 3:07 pm

भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कामगार यूनियन

अखिल भारतीय कन्ट्रक्सन मजदूर महासंघ ने 8 मांगों सौंपा ज्ञापन

पाकुड़ भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कामगार यूनियन ने मुख्यमंत्री के नाम 8 सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन । किसी भी प्रदेश या राष्ट्र का निर्माण एवं उत्थान में कमरतोड़, मेहनतकश मजदूरों का भरपूर
योगदान होता है, सरकार भी मजदूरों के हितों पर ध्यान देती है पर झारखंड प्रदेश के मजदूर
अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। भारतीय मजदूर संघ से सम्बंधित भवन-निर्माण एवं अन्य सनिर्माण कामगार यूनियन
प्रदेश में एक साथ प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर अपेक्षा रखती है मजदूरों के हित में गुणात्मक सुधार होगा। भवन निर्माण एवं अन्य सनिर्माण के निबंधित कामगारों को सरकार द्वारा प्रदत्त योजना का लाभ जैसे सेफ्टी किट्स, औजार किट्स, साईकिल सहायता राशि, बच्चों को छात्रवृत्ति तथा अन्य
लाभ को पाने में अप्रत्याशित विलम्ब होता है एवं कभी कभी लोग लाभान्वित भी नहीं हो पाते
हैं। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को ठेस पहुंचती है। श्रमिक मित्र, श्रम कार्यालय के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की भारी कमी है जिससे कार्य
प्रभावित होता है, रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाय। 234 श्रमिक मित्र को उचित मानदेय दिया जाए।प्रत्येक श्रम कार्यालय में श्रम LEO को समान अधिकार प्रदान कर उसी श्रम कार्यालय में कार्य
निष्पादन करवाया जाय। जैसे कि पाकुड़ के श्रम कार्यालय से साहिबगंज श्रम कार्यालय को
निष्पादन हेतु भेजा जाता है यह भी एक विलम्ब का कारण बनता है। इसपर रोक लगाया जाए।
भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों को श्रम कल्याण बोर्ड में सदस्यता प्रदान किया जाए । ताकि वे अपनी विचार बोर्ड के पदाधिकारियों के बीच रख सकें।
सेफ्टी किट्स, औजार किट्स प्रत्येक दो वर्ष के अंतराल में मुहैया कराया जाए क्योंकि अच्छा
से अच्छा सेफ्टी किट्स और औजार किट्स दो वर्ष से अधिक नहीं चल सकता है। विवाह सहायता राशि, प्रसूति अवकाश सहायता राशि, मृत्यु सहायता राशि में सम्मानजनक
वृद्धि किया जाए। सरकार के सहयोग में जिन जिन कर्मचारियों ने योगदान दिया है और अपने जीवन का
बहुमूल्य समय प्रदान किया है उन्हें धड़ल्ले से छंटनी किया जा रहा है। जैसे कि सहिया, पोसन
सखी, उर्जा मित्र, श्रमिक मित्र, कृषि मित्र लोग उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इन्हें तथा समस्त
श्रमिक वर्ग को उचित सम्मान और मानदेय दिया जाए।
उपर्युक्त मांगों की ओर सरकार तथा प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए संगठन मांग
करती है कि गहन विचार विमर्श कर उचित निर्णय लिया जाए और भविष्य के आंदोलनात्मक
कार्य क्रम को रोका जाय।

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