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March 15, 2026 12:39 pm

समाजसेवी लुतफुल हक के पहल पर रेलवे स्टेशन में निःशुल्क भोजन व्यवस्था का किया गया शुभारंभ

सतनाम सिंह

पाकुड़-अब गरीब और जरूरतमंद लोगों को भूखे पेट सोना नहीं पड़ेगा। भूखे पेट सोने की मजबूरियां खत्म होगी। पाकुड़ रेलवे स्टेशन परिसर में हर रोज दो घंटे निःशुल्क भोजन मिलेगा। यह नेक काम शुक्रवार की देर शाम से किया गया। प्रत्येक दिन शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक भोजन परोसा जाएगा। निःशुल्क भोजन की व्यवस्था गरीबों का हमदर्द समाजसेवी लुतफुल हक करेंगे। नियमित रूप से जरूरतमंदों को भोजन मिलता रहेगा। प्रत्येक दिन कम से कम दो सौ लोगों को भोजन मुहैया कराया जाएगा।निःशुल्क भोजन व्यवस्था से रेलवे स्टेशन में आने जाने वाले जरुरतमंदों को रात के भोजन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।अक्सर रेलवे स्टेशन परिसर में रात गुजारने वाले बेबस गरीबों,रिक्सा चालक और जरूरतमंदों को राहत मिलेगा।उन्हें भूखा पेट सोना नहीं पड़ेगा। यह शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों से आने वाले बेबस और बेसहारा लोगों के लिए भी राहत भरी खबर है।गरीबों के लिए हमदर्द बने लुतफुल हक के इस नेक पहल की प्रशंसा हो रही है। इससे गरीबों को निःशुल्क भोजन की सुविधा के साथ ही दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगा।उक्त कार्यक्रम में ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के शाखा सचिव संजय कुमार ओझा, वरिष्ठ पत्रकार कृपा सिन्धु बच्चन, रेलवे सुरक्षा बल के प्रभाकर चौधरी, ईजरप्पा के अध्यक्ष हिसाबी राय, सचिव राणा शुक्ला,नलिन मिश्रा, लायन्स क्लब आफ पाकुड़ विशाल के अध्यक्ष मंजीत लाल रजक, कमलेश साहा, लाल्टू भौमिक, अभिनाष पंडित, मोनी सिंह, रंजीत राम, सोमनाथ मंडल, मिथिलेश मंडल, मिथिलेश ठाकुर,मोहम्मद इमरान,डाबु दास आदि मौजूद थे।

दो सौ से अधिक गरीबों भोजन किया—-

निःशुल्क भोजन व्यवस्था कार्यक्रम के मौके पर लगभग दो सौ से अधिक गरीबों ने लाईन लगाकर भोजन किया।भोजन के पश्चात गरीबों ने कहा भरपेट भोजन खाया और जिन्होंने भी यह भोजन दिया है।ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ वैसे इंसान की उम्र ईश्वर लंबी करे।

कौन है समाजसेवी लुतफुल हक—-

लुतफुल हक का वर्तमान पता नगर परिषद अंतर्गत बड़ी अलीगंज मुहल्ला है। झारखंड के पाकुड़ जिला के सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक छोटे से गांव उदीतनगर से निकल कर शहर में बसने वाले लुतफुल हक ने गरीबी को बहुत ही करीब से देखा है। गरीबी में पले बढ़े लुतफुल का बचपन काफी मुश्किल दौर से गुजरा है। जिस उम्र में कंधे पर किताब कलम से भरे स्कूल बैग होना चाहिए था,उस उम्र में परिवार चलाने की जिम्मेदारी थी। पेट पालने के लिए मजदूरी करना पड़ा। गरीबी ने उन्हें स्कूल के दहलीज पर कदम भी रखने नहीं दिया। लुतफुल हक अपने संघर्ष भरे बचपन को आज भी याद कर भावुक हो जाते हैं। यहां बताना जरूरी होगा कि लुतफुल हक ने अपना संघर्ष जारी रखा और कड़ी मेहनत कर नया मुकाम हासिल किया। अपनी मेहनत से खुद को स्थापित किया। ईश्वर ने उन्हें गरीबों की सेवा का अवसर दिया है। लुतफुल हक इस अवसर को बिल्कुल भी खोना नहीं चाहते। पिछले कई सालों से लगातार गरीबों की सेवा में जुटे हैं। आर्थिक रूप से सेवा करते ही हैं,कपड़ों से लेकर राशन भी मुहैया कराते हैं।

देश विदेश में मिला सम्मान—

लुतफुल हक उत्कृष्ट समाजसेवा के लिए देश विदेश में सम्मानित हो चुके हैं। इसी साल मुंबई में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने सम्मानित किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक्सिलेंस अवार्ड मिला। कोलकाता में मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के हाथों सम्मानित हुए थे। मलेशिया के कुआलालंपुर में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इधर हाल ही में मुंबई में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और सोनाली बेंद्रे के हाथों सम्मानित हुए। इंडो नेपाल बांग्लादेश मीडिया कांक्लेव 2023 के मौके पर यूपी के आगरा में देश के कानून राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने समाजसेवा के क्षेत्र में सम्मानित किया था।

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