पाकुड़। भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर मंगलवार को पाकुड़ के विभिन्न गांवों में प्रकृति और लोकआस्था का पर्व करमा पूजा श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति पूजा से जुड़े इस पर्व पर बहनों ने भाइयों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखा। शाम को करम डाल की विधिवत स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करम देव और प्रकृति से जुड़ी कथा सुनी गई। पूजा के बाद व्रतधारी महिलाओं और युवतियों ने पारण किया। कई गांवों में रातभर ढोल-मांदर की थाप पर झुमर और पारंपरिक गीत-नृत्य का दौर चलता रहा। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और युवतियों की टोली ने लोकगीतों के साथ पर्व की रौनक बढ़ाई। ग्रामीणों ने बताया कि करमा पर्व प्रकृति के प्रति आभार, अच्छी फसल और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ी समृद्ध लोक परंपरा है। पर्व के अगले दिन करम डाल को श्रद्धापूर्वक जलस्रोत में विसर्जित किया जाएगा।








