पहाड़िया टोला तक पेयजल पहुंचाने के लिए तैयार हुए दो बड़े प्रस्ताव, जल्द बनेगी स्थायी कार्ययोजना।
खबर बनी तो खुली व्यवस्था की आंखें।
पाकुड़। लिट्टीपाड़ा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल सीमलढाब गांव में पेयजल संकट की खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। उपायुक्त मेघा भारद्वाज के निर्देश पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया और ग्रामीणों की समस्याओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद दूरस्थ पहाड़िया टोला तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए दो व्यवहारिक और दीर्घकालिक प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। जांच में पाया गया कि सीमलढाब में संथाल टोला और पहाड़िया टोला नामक दो बस्तियां हैं। संथाल टोला में करीब 35 परिवार रहते हैं, जहां तीन चापाकल चालू अवस्था में हैं। वहीं वन क्षेत्र के भीतर करीब एक किलोमीटर दूर स्थित पहाड़िया टोला में 12 आदिम जनजातीय परिवार निवास करते हैं। यहां के लोग फिलहाल पास से बहने वाली पहाड़ी नदी के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने पहाड़िया टोला में चापाकल लगाने की मांग रखी, लेकिन तकनीकी निरीक्षण में सामने आया कि वहां तक पहुंचने के लिए कोई सुगम सड़क नहीं है। वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाली पगडंडी के कारण बोरिंग मशीन और भारी उपकरण पहुंचाना फिलहाल संभव नहीं है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत सामुदायिक रास्ता विकसित करने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभाग ने दो विकल्प सुझाए हैं। पहले विकल्प में नदी पर लघु इनटेक वेल बनाकर सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजना स्थापित करने का प्रस्ताव है। दूसरे विकल्प में संथाल टोला के पूर्वी छोर पर डीप बोरिंग और जलमीनार बनाकर पाइपलाइन के जरिए पहाड़िया टोला तक पानी पहुंचाने की योजना तैयार की गई है। उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि जिले के दूरस्थ और आदिम जनजाति बहुल क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को प्रस्तावों का तकनीकी मूल्यांकन कर शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और स्थायी पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमलढाब समेत सभी दूरस्थ गांवों के विकास और जनकल्याण के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।








