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April 27, 2026 1:05 am

लोक आस्था का महापर्व छठ, कद्दू भात से प्रारंभ।

राजकुमार भगत

पाकुड़। लोक आस्था का महापर्व छठ सनातन धर्म में कठिन पर्वों में से एक है। जिसमें छठवर्दी 36 घंटे निर्जला उपवास रखकर व्रत को पूरा करते हैं। पंचांग के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि 5 नवंबर से प्रारंभ होकर सप्तमी तिथि 8 नवंबर को प्रातः अर्घ्य के साथ समाप्त होगा। छठ पर्व पहला दिन चतुर्थी तिथि अर्थात 5 नवंबर को नहाए खाए के साथ शुरू होता है। इस दिन पवित्र नदी में या जल में स्नान कर छठवर्ती शुद्ध घी में बना कद्दू भात की सब्जी भोजन करते हैं। हालांकि यह अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग परंपरा के अनुसार की जाती है। पंचमी तिथि को खरना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दूध में बना शुद्ध खीर आदि का भोग छठी मैया को लगाया जाता है। तीसरे दिन षष्ठी तिथि , 7 नवंबर को छठवर्ती संध्या काल में अपने-अपने नजदीकी नदी तालाब गंगा आदि में जाकर डुबकी लगाते हुए सूर्य देव की पूजन करते हैं एवं अर्ध्य देते हैं। सप्तमी तिथि अर्थात 8 नवंबर को उदय कालीन भगवान भास्कर सूर्य देव को पूजन करते हैं एवं उन्हें अर्ध्य देते हैं। इसी के साथ चार दिनों से चला रहा छठ संपन्न हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव छठी मैया की पूजा अर्चना और अर्थ देने से सुख शांति समृद्धि अयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।
अर्घ्य देने का समय
पांच नवंबर- नहाय खाय- पवित्र जल में स्नान करना, शुद्ध मिट्टी के चूल्हे पर शुद्ध घी पर कद्दू भात,कच्चू का सब्जी बनाना भोजन करना।
6 नवंबर- खरना – दिन सूर्योदय 6: 46 बजे एवं सूर्यास्त 5:26 बजे।
7 नवंबर – संध्या अर्घ्य – सूर्य उदय 6:36 में होगा सूर्य अस्त 5:32 पर होगा। इस दिन डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा।
8 नवंबर- प्रातः अर्घ्य- सूर्योदय 6:40 बजे एवं सूर्यास्त 5:40 बजे । इस दिन प्रातः कालीन सूर्य देव भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाएगा।
नोट – ध्यान रहे की हर स्थान का सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय अलग-अलग होता है। अतः छठवर्ती अपने स्थान की जानकारी अपने पंडित जी से प्राप्त करें।
छठ में चढ़ाए जाने वाली प्रसाद
छठ महापर्व को डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में गेहूं के आटा के बने ठेकुआ अरवा चावल से के बने केचुनिया का बहुत महत्व है इसके अलावे बस की टोकरी सूप लोटा थाली कच्चा दूध गंगाजल गन्ना केला नारियल शकरकंद पान सुपारी हल्दी मूली अदरक बड़ा कमला नींबू ,फल फूल पानी फल सिंघाड़ा गुड आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

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