पाकुड़। जिला कांग्रेस कमेटी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या से जुड़े चंदे की निष्पक्ष वित्तीय जांच और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियम) संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रावधानों की संवैधानिक समीक्षा की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने दोनों मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था और श्रद्धा से आर्थिक सहयोग दिया है। ऐसे में चंदे के संग्रह, बैंक खातों, संपत्ति खरीद, भुगतान, उपयोग और लेखांकन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। कांग्रेस ने मांग की कि चंदे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच राजनीतिक अथवा संस्थागत प्रभाव से मुक्त होकर कराई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या आपराधिक कृत्य प्रमाणित होता है तो दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा श्रद्धालुओं से प्राप्त चंदे का पारदर्शी सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह मांग किसी धार्मिक आस्था के विरोध में नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और वित्तीय पारदर्शिता की रक्षा के लिए है।
खनिज कानून पर राज्यों के अधिकार का मुद्दा उठाया
कांग्रेस ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियम) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर भी चिंता जताई। ज्ञापन में कहा गया कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों को खनन से होने वाले राजस्व का उचित लाभ मिलना चाहिए। राज्य को खनन के कारण विस्थापन, प्रदूषण, पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। कांग्रेस ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के मिनिरल एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी बनाम स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मामले में दिए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों के खनिज अधिकारों और उनसे जुड़े कराधिकारों की संवैधानिक स्थिति महत्वपूर्ण है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 2026 के संशोधन में जोड़े गए प्रावधान, विशेषकर धारा 9D, राज्यों की खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर कर, सेस या अन्य लेवी लगाने की शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। जिला कांग्रेस ने राष्ट्रपति से ऐसे प्रावधानों की संवैधानिक समीक्षा सुनिश्चित करने, राज्यों के राजस्व अधिकारों की सुरक्षा, केंद्र-राज्य के बीच व्यापक परामर्श तथा खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व में खनन प्रभावित राज्यों और स्थानीय जनता के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले लाभ में उन राज्यों और लोगों की हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, जो वर्षों से इसके सामाजिक और पर्यावरणीय दुष्परिणाम झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग होने के बावजूद जनविश्वास, जवाबदेही, पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े हैं। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से संविधान की संरक्षक के रूप में उचित हस्तक्षेप की मांग की गई है।








