पांच जलाशयों में केज कल्चर से शुरू होगा मछली पालन, हर लाभुक को मिलेंगे 3.22 लाख रुपए।
पाकुड़। वर्षों से बंद पड़ी पत्थर खदानों में जमा पानी अब पहाड़िया परिवारों की आजीविका का जरिया बनेगा। इन अनुपयोगी जलस्रोतों में मछली पालन कर पहाड़िया समुदाय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। इसके लिए सदर प्रखंड के जुगिगड़िया गांव की पांच बंद खदानों को चिह्नित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में यहां आधुनिक केज कल्चर यानी पिंजरा विधि से मछली पालन शुरू किया जाएगा। जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग की इस पहल से पांच चयनित लाभुकों को सीधे रोजगार से जोड़ने की योजना है। प्रत्येक लाभुक को 3 लाख 22 हजार 200 रुपए का अनुदान दिया जाएगा। विभाग की ओर से लाभुकों को केज कल्चर की तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
खदान का पानी बनेगा कमाई का जरिया।
अब तक बेकार पड़े खदानों के जलस्रोतों का उपयोग मछली उत्पादन के लिए किया जाएगा। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद जलाशयों में केज लगाए जाएंगे और मछली के बीज डाले जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और परिवारों को नियमित आमदनी का साधन मिलेगा। खासकर युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर बनाना प्राथमिकता : काजल तिर्की।
जिला मत्स्य पदाधिकारी काजल तिर्की ने बताया कि बंद खदानों में जमा पानी को आजीविका सृजन से जोड़ने की योजना है। पहाड़िया समुदाय के लोगों को आधुनिक केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना विभाग की प्राथमिकता है। इससे उपलब्ध जलस्रोतों का बेहतर उपयोग होगा और लाभुकों को सम्मानजनक आजीविका मिल सकेगी।








