डिवार्मिंग, परजीवियों के संक्रमण से पशुओं की करता है सुरक्षा: डीएलएम पाकुड़।
सुस्मित तिवारी।
हिरणपुर (पाकुड़ )चूल्हा-चौका करने वाली महिलाओं के हाथ में सुई-सीरिंज आने से इनकी गरीबी का मर्ज अब खत्म हो रहा है। अपने हुनर और मेहनत के बदौलत इन महिलाओं को डॉक्टर दीदी कहा जाता है। अब इनके काम की पहचान इनके नाम से हो रही है।ग्रामीण विकास विभाग अंर्तगत पलाश झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की पहल से महिलाएं एक और सखी मंडल से जुड़कर बेहतर आजीविका की विकल्प की और बढ़ रही है ।तो वहीं दूसरी ओर प्रखंड की आजीविका पशु सखियां लगातार बकरियों को कृमि नाशक दवा पिलाकर रोग से बचाव कर महिला किसानों की आमदनी को दुगुनी करने में जुटी है। बुधवार को आजीविका पशु सखियां,शामपुर, देवपुर, तारापुर आदि गांवों में डोर टू डोर जाकर बकरियों को कृमि नाशक दवा पिलाई ।क्षेत्र के अधिकांश गांवों में आजीविका पशु सखियां बकरियों को कृमि नाशक दवा पिलाकर कृमि से बचाव कर महिला किसानों की आय को दुगुनी करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। प्रखंड में अब तक 65380 बकरियों की कृमि नाशक दवा पिलाया जा चुका है, और ये पहल निरंतर जारी है।
किया कहते है बीपीएम हिरणपुर कुंदन कापरी इन्होंने बताया कि डीवार्मिंग आंतरिक परजीवियों के संक्रमण के साथ साथ फीताकर्मी, राउंड कर्मी तथा फेफड़ों के कर्मियों के संक्रमण से बचाता है।
किया कहते है जिला प्रबंधक आजीविका बीरेंद्र कुमार ने बताया कि आंतरिक परजीवियों के प्रकोप से पशुओं के खून में कमी आना, बढ़ोतरी एवं वजन रूक जाना व इनमें ढीली आंत की बीमारी आदि हो जाती है। इन्होंने ये भी बताया कि , आजीविका पशु सखी दीदियो की मेहनत रंग ला रही है। बकरियों की मृत्यु दर में कमी आई है। ग्रामीण महिला किसान पुनः बकरी पालन की और अग्रसर होकर अपनी आजीविका को बेहतर कर आत्मनिर्भता की और कदम बढ़ाई है।






