किसानों के हित के लिए सरकार के द्वारा से चेकडैम जैसी योजनाओं को स्वीकृति दी जाती है लेकिन विभाग और बिचौलियों के द्वारा योजनाओं का बंदरबांट किया जाता है।
सुस्मित तिवारी
पाकुड़। प्रखंड के शिवतला में जलछाजन परियोजना के तहत चेकडैम का निर्माण किया गया, जिसे आनन फानन में बिना लाभुक के जानकारी के घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर पूरा कर दिया गया। लाभुक बाबूराम से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 6 लाख के तहत चेकडेम के निर्माण में घटिया बोल्डर और बालू के जगह डस्ट का इस्तेमाल किया गया है, आश्चर्य इस बात का है कि चेक डैम का निर्माण सिंचाई के लिए पानी को रोकने के लिए के उद्देश्य किया जाता है परंतु स्थित डैम का निर्माण किसी नदी नाले में नहीं किया गया है बल्कि खेत के बीच में जैसे तैसे घोटाले की नियत से निर्माण कर दिया गया है, इस संबंध में विभाग के जेई अजय कुमार से मोबाइल से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया.. तो कई बार कॉल करने के बाद भी उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। कार्यस्थल पर जब जायजा लिया गया तो पता चला कि चेक डैम के निर्माण से पहले जो बोर्ड लगा होना चाहिए था वह भी नहीं मिला इससे पता चलता है की बिना इंजीनियर के मिली-भगत से इस तरह की घटिया काम को अंजाम नहीं दिया जा सकता है एक तरफ झारखंड सरकार आदिवासियों के विकास के लिए पूरी तरह से तत्पर है वहीं विभाग के अधिकारी सरकार के प्रयास को नजरअंदाज कर रहे हैं।






