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July 13, 2026 9:54 pm

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राहत नहीं मिली तो निजी स्कूल एसोसिएशन जाएगा सुप्रीम कोर्ट : गब्रियल मुर्मू

राजकुमार भगत

पाकुड़। झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने राज्य में निजी विद्यालयों के समक्ष खड़ी मान्यता संबंधी समस्याओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो संगठन सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। जरूरत पड़ने पर झारखंड हाई कोर्ट में भी नई रिट याचिका दायर की जाएगी। यह निर्णय बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित ओपन स्काई स्मार्ट स्कूल में जिला अध्यक्ष गब्रियल मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित एसोसिएशन की जिला स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में जिले के 47 निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों के अलावा मुख्य अतिथि एलेक्स साम, जिला सचिव राजकुमार भगत, पूर्व जिला अध्यक्ष जय दत्ता समेत सभी प्रखंडों के अध्यक्ष, सचिव और विद्यालय संचालक मौजूद रहे।
जिला अध्यक्ष गब्रियल मुर्मू ने कहा कि निजी विद्यालय लगातार प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगठन ने वर्ष 2019 में झारखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी, जिसमें कुछ राहत मिली थी, लेकिन जमीन संबंधी प्रावधान अब भी यथावत हैं।
मुख्य अतिथि एलेक्स साम ने कहा कि मान्यता के लिए शहरी क्षेत्र में 25 डिसमिल और ग्रामीण क्षेत्र में एक एकड़ भूमि की अनिवार्यता अधिकांश निजी विद्यालयों के लिए बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में एसपीटी एक्ट लागू होने के कारण इतनी भूमि उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाता, जबकि मान्यता की अन्य प्रक्रियाएं भी काफी जटिल हैं। जिला सचिव राजकुमार भगत ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद स्थापित विद्यालयों पर 1 जून से 31 अगस्त 2026 तक मान्यता के लिए आवेदन करने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं कई विद्यालयों को अब तक यू-डाइस कोड भी उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे उनके संचालन में गंभीर परेशानियां आ रही हैं। पूर्व जिला अध्यक्ष जय दत्ता ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार को नियमों में व्यावहारिक संशोधन कर योग्य विद्यालयों को मान्यता देने की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए। बैठक में सभी प्रखंड अध्यक्षों और सचिवों को अपने-अपने क्षेत्र के यू-डाइस प्राप्त और यू-डाइस से वंचित विद्यालयों की सूची शीघ्र जिला इकाई को सौंपने का निर्देश दिया गया, ताकि सभी प्रभावित विद्यालयों की ओर से न्यायालय में प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

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