पाकुड़ जिला एवं सत्र न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा मामले में ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो गृहणियों के श्रम और उनके सामाजिक योगदान को नई कानूनी पहचान देता है। प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-पीओ, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) की अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि “हाउसवाइफ इज़ नेशन बिल्डर” और उनका घरेलू योगदान किसी भी वेतनभोगी कर्मचारी से कम नहीं आंका जा सकता। अदालत ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली 28 वर्षीय गृहणी रेखा देवी के परिवार को ₹58.77 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। मामला 20 सितंबर 2022 का है। हिरणपुर-बरहरवा मार्ग पर लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के गम्हारिया के समीप एक तेज रफ्तार ट्रक ने टियागो कार को सामने से टक्कर मार दी थी। हादसे में रेखा देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद लिट्टीपाड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गृहणी का योगदान केवल घर तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह पूरे परिवार की आधारशिला होती है। इसी आधार पर मृतका की काल्पनिक मासिक आय ₹30,000 निर्धारित की गई। इसमें 40 प्रतिशत फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स, 17 का मल्टीप्लायर तथा अन्य वैधानिक मदों को जोड़ते हुए कुल ₹58.77 लाख का मुआवज़ा तय किया गया।
अदालत ने मृतका के पति निरंजन ठाकुर और उनके दो नाबालिग पुत्रों को इस मुआवज़े का हकदार माना तथा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया। यह फैसला केवल एक मुआवज़ा आदेश नहीं, बल्कि गृहणियों के अदृश्य और अमूल्य श्रम को न्यायपालिका द्वारा दी गई बड़ी कानूनी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।





