पत्थर माफिया ने किया ग्रामीणों का दोहन
अपने हक के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे है हाथीगढ के रैयत्ती
बजरंग पंडित
पाकुड़: हिरणपुर अंचल क्षेत्र अंतर्गत हाथीगढ़ गांव जहां के ग्रामीण अपने हक के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे है।हथीगढ़ जहां माफियाओं ने लगभग 90 बीघा जमीन को कुतर डाला। कहीं लीज से बाहर पत्थर उत्खनन किया तो कहीं पहले जेसीबी चलाया गया और बाद में जबरन पैसा थमाया गया।यही नहीं लगभग 35 बीघा पुरातन पतीत पर मात्र 5 हजार प्रति वर्ष के दर से पत्थर उत्खनन किया गया। किसी ने समझौता की राशि मांगी तो बदले में जान से मारने की धमकी मिली तो किसी का खतियान ही गायब हो गया। माफियाओं ने करोड़ों का माल कमाया, लग्जरी गाड़ी खरीदा, अपने लिए ताजमहल बनवाया, लेकिन जमीन मालिक का सूरत और सीरत दोनों नहीं बदली।कभी पत्थर की जरूरत पड़ी तो उन्होंने अपने ही जमीन का पत्थर बजार की भाव से खरीद कर लगाया।हैवी ब्लास्टिंग से आसपास का धरती कांप उठती है,दिल दहल जाता है, कमजोर घरों में दरार आने लगी है, वायु प्रदूषण ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधा का जायजा आप खुद ही लगा सकते है। माननीय जिनको ग्रामीणों की मदद करनी चाहिए तो कुछ उल्टा ही होता प्रतीत नजर आता है।जब जागे ग्रामीण एक जुटता का असर दिखा तो पिछले चार दिनों से क्रशर और खदान बंद पड़ा है।ऐसा नहीं है कि शिकायत नहीं हुई है, खनन पदाधिकारी का टेबल में छान कर देखिए या फिर अनुमंडल पदाधिकारी का ऑफिस में झांक कर देखिए।लेकिन मजाल है इस पर जांच हो, कमिटी गठित हो, दोषियों पर कार्रवाई हो तभी तो गांव वालों ने जीने मरने की जहमत उठाया है। इस पर जांच होगा भी, ऐसी होता दिखाई नहीं देता है।गांव में इतनी चतुराई से इन लोगों ने प्रवेश किया, जिसे संताली में कहा जाता है “सुई लेकाय बोलोयना आर पाल लेकाय दार ना।” अर्थात “सुई के तरह उन्होंने प्रवेश किया और पाल (लकड़ी के हल में लगाए जाने वाला धातू का नुकीला औजार) के तरह जगह बनाया।” आप कह सकते हैं ऐसा कैसे संभव हो सकता है? संभव हो सकता पत्थर व्यवसाइयों का यह बाएं हाथ का खेल है, यहां जिंदा को मुर्दा और मुर्दा को जिंदा बनाने में कोई देर नहीं लगता, तभी तो 90 बीघा कुतर गए पत्थर व्यवसाई वरना ऐसा संभव नहीं था।आज जब ग्रामीण बाबुधन टुडू, छोटो हांसदा, राम टुडू आदि नौजवान आगे बढ़कर ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जान का खतरा भी सताने लगा है। जबकि स्थानीय नेता जिनके परिवार और वर्तमान विधायक का चार दशक से अधिक का लिट्टीपाड़ा विधान सभा में राज रहा है,दिन पर दिन कद बढ़ता गया कमाई के तरीके भी बढ़ते गए, जहां माननीय को अपने क्षेत्र की जनता की भलाई के लिए हर वो कदम उठाया जाना चाहिए जो जनहित के लिए हो लेकिन अफसोस ऐसा कुछ दिखा नही जहां ग्रामीण मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, पेयजल के लिए कई किलोमीटर का हरदिन लंबा सफर तय कर रहे हैं, वही जिम्मेदार राजनीतिक रोटी सेंक रहे है, सूत्रों से यह भी खबर प्राप्त है की पत्थर उद्योग के लिए की जानी वाली ग्राम सभा में एक मोटी रकम तय की हुई है माननीय के आदेश पर अंचल विभाग के द्वारा।





