भगवान शंकर से जीवन के सभी संकट हरने की कामना करती नवविवाहिता।
सतनाम सिंह
पाकुड़। श्रावण का महीना वैसे तो सभी सनातनियों के लिए खास महत्व रखता है, मान्यता यह है कि इस मास में बाबा भोले नाथ को जल्द मनाया जा सकता है, क्योंकि सावन मास महादेव का सबसे प्रिय महीना है जहां सारा संसार भोले की भक्ति मे लिन रहता है वहीं मिथिला और अंगिका समाज के लिए एक उत्सव का अवसर रहता है, मिथिला और अंगिका समाज की नव विवाहिता शादी के बाद मधुश्रावणी पूजा करती है। मधुश्रावणी का पर्व उन परिवारों में मनाया जाता है जिनके परिवार में बेटी की शादी हुई होती है, यह त्यौहार नव विवाहित मानती है जिनकी शादी के एक साल पूरे नहीं हुए रहते हैं. नवविवाहित पूरे 14 दिनों तक नियम निष्ठा के साथ यह पर्व करती हैं। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने सर्व प्रथम मधुश्रावणी व्रत रखी थी. जन्मजन्मांतर तक शिव को अपने पति रूप में रखने के लिए इस पर्व में शिव पार्वती की कथा आज भी सुनाई जाती है, पूरे मिथिलांचल के हर एक गांव में मंदिरों पर एवं शिवालयों पर गांव की नवविवाहिता एक जगह इकट्ठा होकर भगवान महादेव एवं माता पार्वती को खुश करने के लिए और अपना दांपत्य जीवन खुशहाल बनाने के लिए यह पर्व मानती है। इस पर्व की रंगत पाकुड़ जिले में भी है, कई नवविवाहिता इस पूजा मे हिस्सा ले रही हैं, अन्नपूर्णा कॉलोनी निवासी रेल्वे कर्मचारी मुकेश चौधरी व बबीता चौधरी की सुपुत्री मयूरी जो पेशे से सोशल मीडिया मैनेजर है वो भी इस पूजा मे हिस्सा ले रही हैं, मयूरी का मानना है कि आधुनिकता के इस युग मे अपनी परम्पराओं का निर्वाह करने मे एक सुखद अनुभूति होती है, मैं बाबा भोलेनाथ और माँ पार्वती से सभी के मंगल की कामना करती हूँ।






