राजकुमार भगत
पाकुड़।श्री श्री 108 स्वामी सत्यानंद जी महाराज का कार्यक्रम पिछले 12 दिसंबर से ब्रह्म विद्यालय आश्रम में प्रारंभ है। आज तीसरे दिन श्री महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा की वैदिक सिद्धांतों के अनुरूप भक्ति जगत में विभिन्न संतों और उनके उनुयायियों ने अनेक पंथों को चलाया जा रहा है। सबके अपने-अपने मत और विचार हैं।उससे अलग समन्वयवादी दृष्टिकोण को अपनाते हुए भारतीय अध्यात्म के शिखर अद्वैतावतार परमहंस दयाल जी महाराज जी ने सेवा, भक्ति और ज्ञान समन्वित मार्ग को स्थापित किया है ।परमहंस दयाल जी ने उन पंथों का खंडन नहीं कर ज्ञान को सर्वोपरि बताया ।जहां आवश्यकता हुई वैदिक सिद्धांतों की भी अभिनव व्याख्या की । प्रयुक्त बातें ब्रह्म विद्यालय और आश्रम बक्सर बिहार के पंचम पादशाही परमहंस सत्यानंद जी महाराज ने अपने सत्संग के तीसरे दिन कही है । स्वामी जी का प्रतिदिन दो सत्रों में प्रवचन हो ररहे हैं । उनके पाकुड़ और आसपास के सैकड़ो शिष्य प्रशिष्य सत्संग में उपस्थित हो रहे हैं। संपूर्ण भारत में परमहंस दयाल जी द्वारा स्थापित ब्रह्म विद्यालय सेवा भक्ति और ज्ञान का संदेश दे रहे हैं।
प्रथम सत्र सत्संग के समाप्ति के बाद बक्सर बिहार से भजन मंडली के सदस्यों द्वारा परमहंस दयाल जी का कीर्तन गायन भी किया गया। कीर्तन मंडली का नेतृत्व प्रसिद्ध गायक अजय सिंह कर रहे हैं।ढोलक पर भानु पांडेय संगत कर रहे हैं।प्रतिदिन शिष्यों के द्वारा विशेष भंडारा का भी आयोजन किया गया है । स्वामी जी शनिवार तक रहेंगे उनके साथ महात्माओं की टोली भी है जिसमें महात्मा शब्दयोगानंद, महात्मा ओंकारानंद महात्मा बागेश्वर आनंद, महात्मा प्रेमयोगानंद, महात्मा संपूर्णानंद ,महात्मा विशुधानंद, महात्मा ज्ञान सुधानंद जी इत्यादि हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं में आश्रम के भक्त राजीव रंजन पांडे, सुमित साधवानी ,अरविंद सिंह, अजय सिंह इत्यादि प्रमुख रूप से सेवा में लगे है।





