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April 20, 2026 9:02 am

पानी की उपलब्धता एवं सड़क की उम्मीद में थक चुकी ग्रामीणों की आंखे।

24 वर्ष हुए झारखंड बने अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है ग्रामीण।

प्रशांत मंडल

लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)प्रखंड के कर्माटाड़ पंचायत के बड़ा कुड़िया गांव की दुर्दशा देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस गांव की ओर सरकार की नजर पड़ी ही नहीं है।पानी एवं सड़क की आश में ग्रामीणों की आंखे थक चुकी हैं।झारखंड अलग हुए 24 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्र अब भी विकास से कोसों दूर हैं। लिट्टीपाड़ा प्रखंड के करमाटांड़ पंचायत के बड़ा कुड़िया गांव की स्थिति इसकी एक जीवंत मिसाल है।यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां के ग्रामीण झरने के दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।बड़ा कुड़िया गांव में करीब 18 परिवार रहते हैं, जो पूरी तरह झरने के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद से उनके गांव में एक भी चापानल नहीं हुआ है।गांव से आधा किलोमीटर दूर पहाड़ी ढलान पर स्थित झरना ही उनकी पानी की जरूरतों का एकमात्र साधन है।गर्मियों में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे यह दूषित हो जाता है. इसी झरने का पानी इंसानों और मवेशियों दोनों के लिए उपयोग होता है। दूषित पानी पीने के कारण ग्रामीण बीमार पड़ते हैं और इलाज में उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।बारिश के मौसम में पहाड़ों से बहने वाला गंदा पानी झरने में मिल जाता है, जिससे पानी और भी खराब हो जाता है. इससे ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। सड़क का भी घोर अभाव है, जहां कोई सड़क नहीं है।सड़क की सुविधा न होने से ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी एवं सड़क की मांग किया है।

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