चार दशक से ज्यादा राज करने के बाद पानी, बिजली, शिक्षा रोजगार और सड़क के लिए तरसते लिट्टीपाड़ा विधान सभा के ग्रामीण।
प्रशांत मंडल
पाकुड़: लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र, जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का गढ़ माना जाता है, यहां पिछले 40 सालों से जेएमएम का ही प्रभुत्व रहा है। बावजूद इसके, क्षेत्र में विकास की स्थिति बेहद दयनीय है। पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कुंजबोना पंचायत का गोकुलपुर गांव आज भी सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है, जिससे ग्रामीणों में भारी असंतोष है। गोकुलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों, डीसी और बीडीओ से सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें अब तक निराशा ही हाथ लगी है। स्थिति यह है कि बीमार व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लगभग 5 किलोमीटर तक खटिया पर लिटा कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, फिर वहां से एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचाया जाता है। खराब सड़कें, बिजली की कमी और पीने के पानी के अभाव के कारण यहां के निवासियों का जीवन संघर्षपूर्ण बना हुआ है। गांव के लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण तक की सुविधा नहीं मिलती। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना और आबुआ आवास जैसी योजनाओं का लाभ भी यहां के ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है। नाराज ग्रामीणों ने अब आगामी 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक वे मतदान नहीं करेंगे।







