गोमिया। करीब 5 साल पहले चैनपुर -जागेश्वर भाया ललपनिया से गोमिया तक सड़क निर्माण हुआ था और इस सड़क निर्माण के बाद की सुंदरता और सड़क किनारे लगे सड़क सुरक्षा उपकरण को क्षेत्र के सभी राहगीरों एवं वाहन चालकों ने तब देखा था। सड़क निर्माण के बाद सड़क सुरक्षा उपकरण के रूप में तरह-तरह के उपाय सड़क निर्माण करने वाले विभाग अथवा कंपनी ने इस सड़क के गुजरने वाले राहगीरों के लिए किया था। किन्तु आज नाम न छापने के आधार पर कुछ स्थानीय बुद्धिजीवियों ने बताया कि सड़क निर्माण के बाद अगले दो वर्ष होते- होते सभी सड़क सुरक्षा यंत्र चोरी कर लिए गए, उखाड़ दिए गए या स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अपने घरों में प्रयोग में ले आए साथ ही अलग-अलग स्थान पर लोहे, स्टील एवं रेडियम से बने यंत्रों को बेचकर पैसे कमाने का धंधा कुछ अज्ञात लोगों द्वारा योजना बना कर किया गया। परंतु इस चोरी की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि चुपचाप बैठे रहे किसी ने चोरी हो रहे सड़क सुरक्षा यंत्र पर सवाल नहीं उठाया? परिणाम स्वरूप आज 2026 में सड़क किनारे मौजूद सभी सुरक्षा उपकरण चोरी कर लिए गए है और उसकी बिक्री भी कर दी गई लेकिन इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि कुछ बुद्धिजीवों द्वारा मात्र चर्चा का विषय बनकर रह गया।

इस घटना ने अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत को सही कर दिखाया। रास्ते पर मौजूद बहुमूल्य एवं सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से अति आवश्यक सड़क सुरक्षा उपकरणों की चोरी की शिकायत न तो राहगीरों ने की? ना तो स्थानीय लोगों ने की? ना तो इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने की? न तो खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहने वाले पत्रकारों ने की? और न ही स्वत: संज्ञान पुलिस-प्रशासन ने ली? और न ही जिला प्रशासन ने ली? और न ही निर्माण करने वाली कंपनी ने शिकायत की? परिणाम स्वरूप इस रास्ते पर समय-समय पर दुर्घटना होना शुरू हो गया। अब बारिश का समय आ चुका है और दुर्घटना की संभावना पहले से कई गुना अधिक हो चुकी है। वहीं इस मार्ग पर दुर्घटना होने के बाद सैकड़ों महामूर्ख लोग सड़क जाम करते हैं और आम राहगीरों को उस समय बेवजह परेशान करते हैं। वहीं प्रशासन भी मूक दर्शक बनी रहती है। जब स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन जाम खुलवाने पहुंचते है तो छोटे-मोटे रकम देकर पीड़ित परिवार को सड़क जाम हटाने को कहते हैं। यह सिलसिला पिछले पांच वर्षों से चल रहा है। कहां गए सड़क सुरक्षा उपकरण? ना तो रेडियम लाइट का पता चला? न ही रेडियम के पॉल, इंडीकेटर जो सड़क किनारे लगे हुए थे उनका कुछ पता चला ? मजबूत बैरिकेडिंग के लिए लगे लोहे और स्टील के रेलिंग का भी आज तक कुछ पता नहीं चला? A to Z सब कुछ रात के अंदर में धीरे-धीरे चोरी कर लिए गए? उखाड़ दिए गए? स्थानीय घरों में उपयोग कर लिए गए? कबाड़ियों को बेच दिए गए लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा? कुल मिलाकर आम जनता के टैक्स से बने सड़क सुरक्षा उपकरण का घोटाला हुआ और पैसे की बर्बादी भी हुई। क्या लाखों- करोड़ों की संपत्ति की हुई चोरी का कभी भेदन हो पाएगा? सभी ने एकमत में जिला उपायुक्त से इस विषय संज्ञान लेने की मांग की है।





