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April 29, 2026 6:16 am

जिले भर में सुहागिनों ने मनाया हरतालिका तीज व्रत, रही निर्जला उपवास

राजकुमार भगत

पाकुड़। सनातन धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। सुहागिन औरतें अपने पति की दीर्घायु जीवन सुख समृद्धि की मनोकामना से तीज व्रत को मानती हैं। तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यदि उदिया तिथि को देखें तो 18 सितंबर के सुबह 6:07 से 8:34 तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसके अलावा प्रदोष काल में चार पहर की पूजा शाम 6:23 से शुरू हो जाएगी – पहले प्रहर 6:23 से 9:02 तक ,दूसरा प्रहार 9:02 से 19 सितंबर के 12:15 तक, तीसरा प्रहर प्रातः 12:15 से 19 सितंबर के 3:12 तक, चौथा प्रहार 19 सितंबर को 3:12 से शाम 6:08 तक रहेगा।

मां पार्वती एवं भगवान शिव की होती है पूजा

शास्त्र के अनुसार हरतालिका तीज व्रत का संबंध भगवान शिव और पार्वती से है। ऐसा बताया जाता है की सर्वप्रथम मां पार्वती ने शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु सुख समृद्धि के लिए हरतालिका भी तीज व्रत रखती हैं। इस दिन वे पानी तक नहीं पीती है एवं सोलह सिंगार – कुमकुम मेहंदी बिंदी सिंदूर बिछिया काजल चूड़ी , आभूषण आदि पहनकर मां पार्वती एवं शिव की पूजा अर्चना करती है। इसके लिए महिलाएं तालाब नदी आदि की स्वच्छ मिट्टी से शिवलिंग बनती है एवं चंदन धूप फुलेरा पुष्प नारियल अक्षत पान सुपारी इलायची धूप दीप आदि से पूजा करती हैं, भगवान भोलेनाथ को प्रसाद चढ़ती हैं। 19 सितंबर 2023 दिन मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद गौरी शंकर की पूजा की जाती है एवं उनका विसर्जन करने के बाद जल ग्रहण करती है। जिले के सभी प्रखंडों से तीज व्रत सुहागिन स्त्रियों द्वारा मनाए जाने के समाचार है ।

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