सतनाम सिंह
पाकुड़िया प्रखंड के बन्नोग्राम पंचायत अंतर्गत पलासी गांव के मेहनतकश किसान इन दिनों मौसमी सब्जी की खेती के लिए पहचाने जाने लगे हैं। क्योंकि विपरीत परिस्थितियों के बीच इन किसानों ने अपने खेतों में ऐसी फसलें उगाई जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। गांव के प्रगतिशील किसान गोर लेट ने बताया कि पूर्व में हमलोग एक फसली धान की खेती कर अपना गुजर बसर करते थे। परंतु विगत वर्ष के भीषण सूखे ने हमें जहां भूखे रहने को मजबूर कर दिया, वहीं कुछ अलग तरह की खेती के बारे में सोचने पर भी प्रोत्साहित किया। गोर लेट की माने तो आज उनके नदी किनारे खेत में परवल की लताओं से लहलहा रही हैं। यही नहीं उनके देखा देखी यहां दर्जन भर से ज्यादा किसान पारंपरिक खेती को छोड़ नदी किनारे स्थित खेतों में विभिन्न प्रकार के साग सब्जियां उगाई जाती है जैसे परवल , भिंडी, बैगन, कच्चु, कद्दू कोहड़ा, झींगा, एवं विभिन्न प्रकार की अन्य साग सब्जियों की खेती कर अपने खेतों में हरियाली के साथ- साथ जीवन में भी खुशहाली लाने में सफल हुए हैं।क्षीमती लेट ने बताया कि इस वर्ष बाजार में परवल थोक भाव40 से 50 रुपए किलो जैसी अच्छी कीमत पर बिक रही है।परंतु दुर्भाग्य देखिए ऐसे प्रगतिशील किसानों को अबतक ना ही उन्नत खेती हेतू कोई सरकारी सुविधा मिली ना ही इन्हें कृषि लोन ही मिला।क्योंकि लोगों की माने तो बैंकों में यहां कृषि लोन उसी सक्रिय तथाकथित किसान को मिला बिना किसी सरकारी सहायता के भी वे किसानी को नया स्वरूप देने में सफल रहे हैं। परन्तु सोचनीय यह भी हैं कि अगर इन जैसे मेहनतकश किसानों को सरकार की मदद मिलती तो आज इनके चेहरे पर आई हल्की मुस्कान ठहाकों मेंश्री लेट ने बताया कि अबतक यहां के दर्जनों किसान एक लाख रुपए से ज्यादा का सिर्फ परवल बाजार में बेचकर अच्छी कमाई कर चुके हैं। इसके अलावे,करेली, झींगा, सत्पुतिया, साग आदि तब्दील हो सकती थी। किसानो ने बताया कि पिछले वर्ष सूखे से सबक लेकर सब्जी की खेती की धान में पानी की जरूरत ज्यादा है पर सब्जी में पानी कम लगता है यही कारण है कि आज हम लोग सब्जी की खेती कर रहे हैं पानी की जरूरत पड़ने पर दूर स्थित नदी से पंपसेट के द्वारा पाइप से पानी खेतों में पहुंचाना पड़ता है।







