हावड़ा रेलवे डिवीजन के द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाया गया सबवे हाथी का दांत साबित हो रहा है
हावड़ा रेल डिवीजन के इंजीनियरिंग की विफलता और नाकामी को दर्शाता और पाकुड़ के लोगों को चिड़ाता यह पाकुड़ रेल सबवे।
सतनाम सिंह पाकुड़।
पाकुड़: पाकुड़ रेलवे फाटक के पास हावड़ा रेल डिवीजन के द्वारा बनाया गया सबवे के दोनों तरफ के लोगों की सहूलियत को ध्यान में रख कर बनाया गया था।रेल सबवे बनने के बाद फाटक के दोनों तरफ के लोगों को फाटक के जाम से निजात तो मिली, लेकिन यह सबवे हल्की बारिश और बारिश के दिनों सबवे में पानी के जमावड़े से आम के साथ खास भी अस्त व्यस्त हो जाते हैं।सब- वे से पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से सब- वे में पानी जमा हो जा रहा है। स्थिति यह है कि थोड़ी देर की बारिश से सब-वे में ऊपर तक पानी भर जाता है।सब वे में पानी भरने के बाद स्थानीय समेत राहगीर व मजदूरों को इस पार से उस पार आने जाने में काफी परेशानी उत्पन्न हो जाती है। रविवार की हुई हल्की वर्षा से सब- वे में लबा लब पानी भर गया है। नतीजा यह है कि शहरवासी समय राहगीर व मजदूरों का आवागमन बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों में विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। जो किसी दिन धरना-प्रदर्शन के रूप में सामने आ सकता है।अंडर ब्रिज में तीन से चार फीट तक पानी जमा है.साइकिल हो या बाइक सवार सभी को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.चारपहिये वाहनों को तो दूसरे रास्ते से होकर जाना पड़ रहा है. रेलवे द्वारा अंडर ब्रिज बनाने के बाद से पानी निकासी को लेकर अब तक किसी प्रकार का पहल नही किया है. जिससे बरसात के दिनों में उक्त अंडर ब्रिज पर पानी जम जाता है.. ब्रिज के नीचे पानी जमा हो जाने के कारण लोगों को एक साथ कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है.
दरअसल यह सबवे हावड़ा रेल डिवीजन के इंजीनियर की एक बड़ी विफलता को भी दर्शाता है,जिन्होंने यह रेल सबवे पानी की निकासी को ध्यान में रखकर नही बनाया है।पाकुड़ रेल सबवे में बारिश होने पर दो से तीन फीट पानी का जमावड़ा हो जाता है,जिससे लोगों को दोनो तरफ से आवागमन में काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है,टोटो,टेंपू तो बारिश होने के बाद निकल ही नहीं पाते है,मोटरसाइकिल किसी तरह निकलते भी है तो कुछ पानी में ही फंस जाते है,पानी बाइक के साइलेंसर के अंदर तक चला जाता है,जिससे गाड़ी पानी में बंद हो जाता है। बताते चलें कि पैदल यात्री जलजमाव से परेशान होकर जान जोखिम में डालकर रेल लाइन पार करने को मजबूर हो जाते हैं।
बताते चलें कि अमृत भारत रेलवे स्टेशन के अंतर्गत पाकुड़ रेलवे स्टेशन को जोड़ा गया है। परंतु यहां सिर्फ और सिर्फ कागजी कलम पर ही चल रही है। हावड़ा डिवीजन के वरीय पदाधिकारी कई बार रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर जा चुके हैं। लेकिन मौजूदा प्रशासन द्वारा ना उनको इस गंभीर समस्या के बारे में अवगत कराया गया है और ना रेलवे डिवीजन के वरीय पदाधिकारी की नजरों में पाकुर की समस्या नजर आती है। करोड़ों रुपए के राजस्व देने वाले पाकुड़ स्टेशन की ये स्थति दो-चार महिनों की नहीं, बल्कि कई वर्षों से है. फिर भी रेलवे प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं है. हावड़ा रेल डिवीजन के द्वारा यातायात और लोगों की सहूलियत के लिए बनाया गया सबवे बारिश के बाद रेल इंजीनियर की विफलता और नाकामी को दर्शाता है।





