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May 15, 2026 4:53 pm

10 फरवरी से 25 फरवरी तक लोगों को खिलाई जाएगी फ्लेरिया उन्मूलन की दवा

फाइलेरिया बीमारी की पता लगने में लगते हैं 5 से 10 वर्ष

स्वराज सिंह

पाकुड़। गुरुवार को डॉक्टर के के सिंह भिवीडी पदाधिकारी की अध्यक्षता में सदर अस्पताल के सभागार में फाइलेरिया बीमारी उन्मूलन हेतु एक दिवसीय ज़िला स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक दिवसीय प्रशिक्षण में राज्य से आए पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार के द्वारा बताया गया कि यह पूरे झारखंड के सभी जिलों में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है और यह तुरंत से पता नहीं चलता, बीमारी का पता लगने में कम से कम 5 साल से 10 साल लग जाते हैं। इसलिए इस बीमारी से बचने के लिए वर्ष में एक बार सभी उम्र के लोगों को यह दवा खानी है और यह 5 वर्ष से 6 वर्ष तक लगातार खानी है। यह दवा 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिला एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को छोड़कर सभी उम्र के लोग यह दवा खाएंगे। यह दवा खाली पेट नहीं खानी है कुछ नाश्ता या खाना खाने के बाद ही खिलाई जानी है। यह प्रशिक्षण प्रखंड स्तर पर होने वाली प्रशिक्षण से संबंधित है। प्रखंड स्तर के प्रशिक्षण को बेहतर तरीके से करवाने के लिए बताया गया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 10 फरवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। 10 फरवरी से लोगों को बूथ में फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया जाएगा जबकि छूटे हुए लोगों को 11 फरवरी से 25 फरवरी तक डोर टू डोर जाकर दवा खिलाई जाएगी। दवा खिलाने का काम सहिया और सेविका के द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान दो प्रकार की दवा का सेवन कराना अनिवार्य है।
प्रशिक्षण में पिरामल फाऊंडेशन के डीपीओ आबिद के द्वारा माइक्रो प्लान एवं रिपोर्टिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई। मौके पर जिलें के सभी प्रखंड से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीपीएम, बीएएम, एसआई, एमटीएस, केटीएस, एलटी, सहयोगी पार्टनर डब्ल्यूएचओ, पीरामल फाउंडेशन के पीसीआई के जिला एव प्रखंड स्तर के पदाधिकारी एव कर्मी उपस्थित थे।

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