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May 14, 2026 10:56 pm

अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल,सामाजिक कार्यकर्ता ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शी परीक्षा की उठाई मांग।

22 वर्षों से पद पर जमे सचिव पर गंभीर आरोप, सीसीटीवी निगरानी और प्रशासनिक देखरेख में चयन प्रक्रिया कराने की मांग तेज

पाकुड़। जिले के विभिन्न अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक एवं माध्यमिक आचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र लिखकर निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कदाचार मुक्त नियुक्ति की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व में भी कई नियुक्तियों में अनियमितता, पक्षपात और नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

विद्यालयवार पदों का विवरण

बंगला कन्या मध्य विद्यालय, पाकुड़ में सेवानिवृत्ति के बाद स्वीकृत पदों के विरुद्ध कुल 10 सहायक आचार्य की आवश्यकता बताई गई है। इनमें 07 पद इंटरमीडिएट प्रशिक्षित तथा शेष 03 पदों में भाषा (हिन्दी/अंग्रेजी), विज्ञान एवं गणित तथा सामाजिक विज्ञान के एक-एक पद शामिल हैं।
जिदातो बालिका उच्च विद्यालय में कुल 04 माध्यमिक आचार्य पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है, जिसमें हिन्दी, जीव विज्ञान/रसायन शास्त्र, गणित/भौतिकी और संस्कृत विषय शामिल हैं। वहीं जिदातो बालिका मध्य विद्यालय में कुल 06 सहायक आचार्य पदों की आवश्यकता है, जिनमें इंटरमीडिएट प्रशिक्षित, भाषा, विज्ञान-गणित तथा सामाजिक विज्ञान के पद शामिल हैं।

पारदर्शिता को लेकर मांगें तेज

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने मांग की है कि पूरी चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा के माध्यम से कराई जाए तथा उसमें सीसीटीवी निगरानी, वीडियोग्राफी और स्वतंत्र दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित हो। साथ ही मेधा सूची और प्राप्तांक का सार्वजनिक प्रकाशन अनिवार्य किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की दलाली, आर्थिक लेन-देन, भाई-भतीजावाद या अनियमितता पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

22 वर्षों से पद पर बने रहने का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि पाकुड़ के तीन प्रमुख अल्पसंख्यक विद्यालयों में एक सचिव पिछले 22 वर्षों से पद पर काबिज हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि मेथोदिस्ट चर्च परिसर में संचालित लगभग 10 संस्थाओं में सचिव के परिवारजन और करीबी लोग कार्यरत हैं, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बन रही है।

पुराने चयन पर भी उठे सवाल

उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई नियुक्तियाँ केवल औपचारिकता मात्र रही हैं, जहां नियमों का दिखावा कर चयन प्रक्रिया पूरी की जाती रही और मनचाहे अभ्यर्थियों का चयन किया जाता रहा।

हितों के टकराव पर आपत्ति

मनोज सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि चयन समिति के किसी सदस्य का परिवार या रिश्तेदार उम्मीदवार हो, तो उसे प्रक्रिया से अलग किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

प्रशासनिक निगरानी की मांग

उन्होंने झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत निवारण के लिए उपायुक्त को सक्षम प्राधिकारी घोषित किया गया है। मनोज सिंह ने मांग की कि प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन और दस्तावेजों की जांच पूरी तरह जिला प्रशासन की निगरानी में हो, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।
मनोज सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तभी संभव है जब चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो तथा योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक मिले।

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