सुदीप कुमार त्रिवेदी
लोकसभा चुनाव से ऐन वक़्त पहले इडी के रेड व राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री सह पाकुड़ विधानसभा के विधायक व कद्दावर नेता के अधीनस्थ कर्मचारी के पास मिले धन के अकूत अंबार को लेकर जहाँ एक ओर पूरे देश का माहौल गरमा गया है वहीं दूसरी ओर राजमहल लोकसभा क्षेत्र की चुनावी सरगोशियाँ एक अलग करवट लेती आ रही हैं । गौरतलब हो कि गत दिनो इडी के द्वारा दिए गए दबिश में राजमहल लोकसभा क्षेत्र के कद्दावर नेता आलमगीर आलम के करीबी के पास से अकूत नोटों के अंबार पाए गए। उक्त आशय का समाचार देश के कई राष्ट्रीय व राज्यीय समाचार चैनलों में प्रमुखता से दिखाया जाने लगा, जिसे लेकर स्थानीय स्तर की मीडिया भी सक्रीय हो उठा, हालांकि इडी के इस कार्यवाही को गठबंधन दलों के स्थानीय नेता एक साजिश की तरह प्रस्तुत कर रहे हैं परंतु भीतर के सूत्र बताते हैं अचानक चुनाव से पूर्व इस कार्यवाही से गठबंधन दलों के नेता का आत्मविश्वास डगमगा चुका है । चुनाव की तैयारी को लेकर बात की जाए तो खासकर कांग्रेस के हर कार्यकर्ता व नेता इस चुनाव में पूरी ताकत लगा चुके हैं एवं दिन रात जनसंपर्क अभियान कर रहे थे परंतु इस घटनाक्रम ने उनके अंदरूनी विश्वास को हिलाकर रख दिया । इस बात को उस वक्त और बल मिला जब इस मुद्दे पर काँग्रेस प्रदेश महासचिव सह पाकुड़ जिला प्रभारी तनवीर आलम से जब दूरभाष पर उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इस मुद्दे पर वो कुछ नहीं बोलेंगे, लिहाजा सीधे विधायक व मंत्री आलमगीर आलम से संपर्क साधा जाना चाहिए, तत्पश्चात आलमगीर आलम के दूरभाष पर जब संपर्क साधा गया तो उनके किसी करीबी ने मंत्री महोदय के नामांकन सभा मे व्यस्त होने का हवाला देते हुए फोन काट दिया गया । अमूमन पाकुड़ जिला प्रभारी तनवीर आलम को हाजिर जबाबी व बेबाक तरीके से अपनी बात को रखने के लिए जाना जाता है । इस मामले को लेकर शहर के कुछ वयोवृद्ध व काँग्रेस के पारंपरिक मतदाता वर्गों में भी अच्छी खासी नाराजगी देखी जा रही है । राजमहल लोकसभा चुनाव की बारीकी को करीब से जानने वाले एक काँग्रेसी व अधिवक्ता ने नाम ना छापने के शर्त पर बताया कि कल तक यही बात बताई जा रही थी कि भाजपा ईलेक्टोरल बांड के तहत अकूत धन संचय कर रखा है तो फिर वो धन काँग्रेस के नेता व उनके करीबी के घर से ही क्यों निकल रहे है ? हालांकि इस मुद्दे पर जिला भाजपा ने स्पष्ट तौर पर अपना पत्ता नहीं खोला है लेकिन इतना तो तय है कि एनडीए गठबंधन को इंडिया गठबंधन ने बैठे बिठाए मौका दे दिया है ।






