सुदीप कुमार त्रिवेदी
जब सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का कुछ इसी तरह के अघोषित संदेश देते ये टोटो चालक व ओटो चालक अपनी वही पूराने रवैए व मानो इन्ही के द्वारा बनाए गए ट्रैफिक नियमों के अनुसार पूरे शहर में विचरण करने को अपना शगल बना चुके प्रतीत हो रहे हैं । ना कोई चलने की जगह, ना कोई ठहराव का स्थल, जहाँ मर्जी, वहीं रूकना है और बस चल देना है, जबकि कुछ दिनों पहले ही जिला परिवहन विभाग सक्रीय होते हुए इन बिना रजिस्ट्रेशन वाले टोटो की धरपकड़ की थी, जहाँ पर जूर्माने वसूल जाने के बाद सही तरीके से सड़कों पर परिचालन की हिदायत भी दी गई थी, इतना ही नहीं विभाग के द्वारा बजाफ्ते ध्वनि विस्तारक यंत्र से माइकिंग भी करवाई गई थी, परंतु फिर से वही हाल । इन अनियमित व अनियंत्रित टोटो चालकों के कारण पूरे दिन शहर के रेलवे फाटक से लेकर उपायुक्त आवास तक जाम का की स्थिति बनी रहती है । खासकर पेट्रोल पंप, ट्रेंडी बाजार, हाटपाडा चौक, नगर थाने के सामने, पुस्तकालय चौक की सड़के शाम तक तो इन टोटो चालकों से जान बख्श देने की भीख माँगती प्रतीत होती है लेकिन ये तो चलेंगे खुद की चाल । उपर से तुर्रा ये कि इंदिरा चौक से पगर थाने की चाहरदीवारी से लगती सड़कों पर फल व सब्जी के दुकान लगे रहते हैं जिसके कारण स्थिति और भी भयावह रूप ले लेती है ।





