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May 9, 2026 2:50 pm

प्रो डॉ श्याम किशोर सिंह का निधन एक हिंदी युग का अंत है।

वे हिंदी साहित्य में केवल झारखंड ही नहीं राष्ट्रीय पहचान था। उनकी रचना किताबें नाटक कहानी आदि आज भी वि वि में पढ़ाई जाती है उन्होंने अपनी पढ़ाई बीएचयू बनारस में किया था । साहिबगंज महाविद्यालय, साहिबगंज में उनका योगदान 1975 में हिंदी विभाग में किया गया।

01 .04. 2000 में सिदो- कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय , दुमका से सेवानिवृत हुए थे। वे स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के विद्वान शिक्षक के साथ हंसमुख और छात्र छात्राओं के हित में हमेशा कार्य करते थे।

उनका समय से कक्षा लेना अन्य शिक्षको के लिए प्रेरणा और उदाहरण है। महाविद्यालय विश्वविद्यालय के स्थापना काल से ही विश्वविद्यालय एवं हिंदी विभाग स्नातकोत्तर विभाग को स्थापित किया।

बहुत सारे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनके लिखित नाटक का विमोचन भी किया गया।हिन्दी साहित्य के जगत में उनका नाम अमिट निशानी रहेगा।वो ख्याति प्राप्त हिन्दी साहित्य के हस्ताक्षर प्रोफेसर नरवर सिंह के मार्गदर्शन में पीएचडी किया था।

उनका एक बेटा जो इटली में कार्य करता है एक बेटी गुजरात में है एवं पत्नी अपने पीछे छोड़ गए ।

आज तड़के सुबह 7:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

वो आज भी पढ़ने लिखने में रुचि रखते थे।उनका हिन्दी सृजन में योगदान महत्वपूर्ण है ।

प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार सिंह उनके पूर्व छात्र रह चुके ने कहा कि उनका नियमित कक्षा लेना समय से कक्षा में प्रवेश करना हिंदी साहित्य को रोचक तरीके से पढ़ाते थे। वे हमेशा हंसमुख रहते थे। छात्र छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय थे।एक विद्वान हिन्दी के शिक्षक रहे वे सिद्धो- कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका में स्नातकोत्तर विभाग हिंदी में की अपना योगदान दिया और सिद्धो- कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका से सेवा निवृत हुए।
वे सिंडिकेट के सदस्य भी रह चुके थे एवं अन्य प्रशासनिक समिति आदि में भी सदस्य रहे थे । उनकी ख्याति प्राप्त रचना बाघनखा बहुत लोकप्रिय थे। विभाजित बिहार- झारखंड में पहले तिलका मांझी विश्वविद्यालय भागलपुर में और 1992 में सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका में अपना योगदान दे चुके थे। उनका जन्म 1937 में हुआ था ।उनका 88 साल में निधन हुआ।

उनके निधन पर प्रो0 महेंद्र प्रसाद सिंह, सेवानिवृत शिक्षक नरेश कुमार सिंह दुख जताया वही डॉ सुधीर कुमार सिंह पूर्व कुलसचिव , डीएसडब्ल्यू पूर्व प्राचार्य ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि उनका विश्वविद्यालय एवं हिन्दी विभाग में योगदान को हमेशा याद रखेगा।

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