कहां हर समुदाय के लोग मांझी परगना लहान्ति बैसी संगठन को अपना नैतिक समर्थन दे ताकि क्षेत्र का विकास की गति को सही दिशा तथा रफ्तार दे सकेऔर
सतनाम सिंह
पाकुड़: हूल दिवस के मौके पर मांझी परगना लहान्ति बैसी संगठन ने एक संदेश जारी किया है. संदेश जारी करते हुए संगठन के जिला अध्यक्ष सनत कुमार सोरेन ने लिखा है कि यह सर्वविदित है की महान क्रांतिकारी जननायक अमर शहीद सिद्धू कान्हू के नेतृत्व में हूल क्रांतिकारी के बाद ही अंग्रेज सरकार को संथालों का हक़ और अधिकार दिया गया तथा इसके पूर्व से चले आ रहे शासन व्यवस्था को मान्यता देते हुए 22 दिसंबर 1855 को संथाल परगना एक्ट xxxvii(37-1855)लागू किया गया. इस कानून को संथाल परगना में सामान्य कानून व्यवस्था से अलग किया गया तथा संथाल परगना को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया.इसके बाद यहां के जमीन का खरीद बिक्री रोकने तथा शासन व्यवस्था को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए,लेकिन दुख की बात यह है कि वे सभी कानून किताबों के पन्ने में ही दबकर रह गए हैं. जरूरत है अभी उन सभी कानून की जानकारी हासिल करने की, प्रशासन तथा सरकार को जगाने की तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना की भी , तथा इससे भी बड़ी आवश्यकता है अपने आप को पुर्नजागृत करने की. तो इसके लिए हम तमाम लोग एक साथ मिलकर पिछला कम बेशी तथा गिला शिकवा को दूर करते हुए हूल दिवस को सफल एवं यादगार बनाएं. पाकुड़ जिला के तमाम बुद्धिजीवी अधिवक्तागण व्यवसायी तथा हर खेती मजदूर साथियों से हमारा विनम्र प्रार्थना होगा कि आप भी हमें (मांझी परगना लहान्ति बैसी संगठन )अपना नैतिक समर्थन दे ताकि हम भी आपके साथ कदम मिलाते हुए आगे बढ़ सके तथा हर क्षेत्र का विकास की गति को सही दिशा तथा रफ्तार दे सके. सरकार के हर क्रियाकलाप पर एक साथ मिलकर नजर रख सके तथा सरकार को आम जनता के आवश्यकता पर बल देने पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कर सके. समाज में रह रहे हर वर्ग के शोषित बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाने का कामे सभी के सहयोग से संगठन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने का काम करेंगे.







