पाकुड़ की धरती से कई नये चेहरे संभावित उम्मीदवार, आलमगीर आलम या तनवीर आलम? वहीं दूसरी ओर भाजपा, अजहर इस्लाम, अकील अख्तर, अधिवक्ता अशरफुल शेख, और हाजी तनवीर।
यासिर अराफ़ात
पाकुड़ : झारखंड विधानसभा चुनाव- 2019 में आलमगीर आलम ने सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड बनाया था । पाकुड़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी आलमगीर आलम ने भाजपा प्रत्याशी वेणी प्रसाद गुप्ता को 65,108 मतों के अंतर से पराजित किया था । जीत का यह अंतर झारखंड विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा अंतर था । आलम पाकुड़ से चाैथी बार विधायक चुने गए थे । वे झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2019 की जीत ने उन्हें ग्रामीण विकास विभाग का मंत्री बना दिया गया.
कुछ दिलचस्प होने जा रहा है इस बार का पाकुड़ विधानसभा का चुनाव
2024 में पाकुड़ विधानसभा में होने वाला विधानसभा चुनाव दिलचस्प होते हुए नजर आ रहा है. हालांकि पिछली बार त्रिकोणीय चुनाव हुआ था एक तरफ जहां आलमगीर आलम उम्मीदवार थे तो वही उनके विपक्ष में दो-दो नेता सामने थे. आजसू पार्टी से अकील अख्तर बीजेपी से वेणी प्रसाद गुप्ता. लेकिन उस समय आलमगीर आलम की टक्कर भाजपा से ही हुई थी. इस बार ऐसा होते हुए नहीं दिख रहा है. एक तरफ तो अभी तक आलमगीर आलम आरोपों के घेरे को लेकर ईडी का शिकार हुए पड़े है. कांग्रेस की तरफ से कौन उम्मीदवार होगा यह बस आम लोग कयास ही लगा रहे हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर चुनाव से पहले आलमगीर आलम जेल से नहीं छुटते हैं तो वह जेल से ही कांग्रेस पार्टी की टिकट से ही चुनाव लड़ेंगे. और कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव से पहले वह छूट सकते हैं. हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर आलमगीर आलम की जगह उनके सुपुत्र तनवीर आलम चुनावी मैदान में उतरते हैं तो भी कांग्रेस कार्यकर्ता उनके लिए चुनाव लड़ने के लिए तैयार है. परंतु आपको जानकारी के लिए बता दें कि पाकुड़ विधानसभा को दो भागों में बांटा जाता है गुमानी दूसरा पाकुड़. हालांकि पाकुड़ में वोटरों की तादाद ज्यादा है. पाकुड़ विधानसभा में अभी तक जो सामने नजर आ रहा है स्वयं पाकुड़ की धरती से उद्योगपति सह समाजसेवी अजहर इस्लाम चुनावी मैदान में उतरते हुए नजर आ रहे हैं. अजहर इस्लाम अगर चुनाव लड़ते हैं तो यह उनका पहला चुनाव होगा.वही पाकुड़ की धरती से हीऔर एक मशहूर चेहरा चुनावी मैदान में सामने दिखाई दे रहे हैं. पाकुड़ के उद्योगपति तथा समाजसेवी हाजी तनवीर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऍम आई ऍम से संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस से अधिवक्ता असरफुल शेख चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं. फिलहाल अधिवक्ता अशरफुल शेख झारखंड तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष है. तृणमूल कांग्रेस पार्टी की तरफ से इससे पहले भी वह तीन दफा चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि अकील अख्तर के के बारे में भी लोगों के बीच यह चर्चा हो रही है कि अकील अख्तर टीएमसी का दामन थाम सकते हैं. क्योंकि हाल ही के दिनों में अकील अख्तर ने सुदेश महतो को बाय-बाय कह दिया है. वही पिछली बार की तरह इस बार भी पाकुड़ विधानसभा के लिए भाजपा अपना उम्मीदवार पाकुड़ की धरती का ही चेहरा उतारने की संभावना है. यानी अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी का पाकुड़ क्षेत्र में जो वोटर है आने वाले दिनों में शायद यह वोटर कई भागों में बट जाए. कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का समीकरण भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. क्योंकि पाकुड़ से चुनावी मैदान में जहां एक तरफ आलमगीर आलम या फिर उनका बेटा तनवीर आलम हो, और उनके सामने उद्योगपति और अली अकबर का बेटा अजहर इस्लाम हो, या फिर हाजी तनवीर हो. इसके अलावा अकील अख्तर का खुद का एक पाकुड़ क्षेत्र में वोट बैंक भी है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता.यह कहीं ना कहीं इशारा है की इस बार की लड़ाई कांटे की लड़ाई हो सकती है. हालांकि अभी सिर्फ कयास ही लगाया जा सकता है चुनाव के नतीजे आते-आते क्या कुछ समीकरण बदलते हैं यह आने वाला समय ही बता पाएगा. हां कुछ राजनीतिक ज्ञान रखने वाले विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अली अकबर का बेटा अजहर इस्लाम अगर चुनावी मैदान में उतरते हैं हालांकि वह चुनावी मैदान में उतारने की घोषणा कर चुके हैं. तो वह कहीं ना कहीं आलमगीर आलम का जो वोट बैंक है उस वोट बैंक पर सेंध मारी कर सकते हैं.










