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May 1, 2026 9:11 am

बुनियादी सुविधाओं को पूरी करना सरकार के लिए कितना चुनौती पूर्ण?

यासिर अराफ़ात

पाकुड़ : जिंदगी जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा और भी कई तरह की सुविधाओं की जरूरत पड़ती है. हम पाकुड़ के लोग 21वीं सदी में जीने के बावजूद अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है. बिहार से झारखंड प्रदेश अलग होने के बाद कई सरकार आई,कई सरकार गई. आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू से रहा है और आगे भी रहेगा. लेकिन सवाल यहां पर यह है कि क्या बुनियादी सुविधाओं को पूरी करने के लिए सरकार के पास क्या चुनौती है. पाकुड़ में बेहतर हॉस्पिटल, हर गांव में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, जिला के सभी सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की भांति बनाना, बेरोजगारी में कमी लाना, क्षेत्र के किसानों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना, क्षेत्र के मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी राशि मिलना, क्षेत्र के बच्चों के लिए बेहतर मेडिकल कॉलेज बनाना, वकालत की पढ़ाई के लिए लॉ कॉलेज का निर्माण करना. यह सारे काम सरकार के लिए कितना चुनौती पूर्ण काम है? क्या सरकार के लिए यह संभव है? अगर संभव है तो सरकार इस पर ध्यान क्यों नहीं देती? असल में इसकी सबसे जो बड़ी वजह है वह है आम लोगों के अंदर जागरूकता का ना होना. राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की अगर बात छोड़ दे और सिर्फ और सिर्फ आम आदमी की बात की जाए तो जब तक आम आदमी, आम युवा इन सब मुद्दों को लेकर जागरूक नहीं होंगे तब तक यह संभव ही नहीं. युवाओं के हाथों में बहुत कुछ होता है. युवाओं की शक्ति वह शक्ति है जो जमाने को बदलने में भी माहिर है. राजनीतिक दलों से जुड़े लोग तो सिर्फ अपनी पार्टी का ही गुणगान करते दिखेंगे. पर आम लोग, जिला के आम युवा,जब इन सब चीजों के लिए मन में ठान लेगा तो बहुत कुछ बदलने की संभावना है. राजनीति से हटकर अगर बात की जाए तो इन सब चीजों के लिए हम मेहनत ही नहीं करते. सरकार तो जनता के पैसे से ही चलती है. फिर क्यों हम अपने हक और अधिकार ना मांगे. सरकार किसी की भी रहे कोई फर्क नहीं पड़ता. मगर फर्क तो तब पड़ता है जब इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं समाज के लोग.

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