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May 1, 2026 9:32 am

समाज को सशक्त बनाने के लिए समाजसेवी संस्थाओं की अहम भूमिका, युवाओं के हाथों में समाज की बागडोर

यासिर अराफ़ात

पाकुड़ : आम इंसान के सामने कई बार ऐसे मौके आते हैं की चाह कर भी कठिन परिस्थितियों से गुजरने वाले लोगों की सहायता करने में असमर्थ हो जाते हैं. इसकी सिर्फ एक ही वजह, खुद सशक्त नहीं है तो दूसरे को क्या मदद करें. लेकिन क्या यह संभव नहीं है? पाकुड़ जिला में कई ऐसे लोग हैं जिनका शायद तीन वक्त की रोटी का भी इंतजाम नहीं है. नतीजे के तौर पर वे लोग दूसरों के सामने हाथ फैलाने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इनमें से बहुत सारे ऐसे खुद्दार भी लोग मिलते हैं जो भूखे पेट तो रहना मंजूर करेंगे मगर दूसरों के सामने हाथ फैलाना कभी मंजूर नहीं करेंगे. आर्थिक तंगी के कारण हमारे पाकुड़ जिला में कई लोग रोजाना भिक्षा करके ही अपना दिन गुजारा करते हैं. जिला के अंदर कई ऐसे छोटे-छोटे बच्चे देखने को मिल जाएंगे जिसकी उम्र स्कूल जाने की उम्र होती है. लेकिन इतनी आर्थिक तंगी रहती है की छोटे-छोटे इस तरह के बच्चे स्कूल जाने के बजाय कोयला ढोते हैँ, होटल में काम करते हैं, दुकानों में काम करते हैं, कचरा बिनने का भी काम करते हैं. क्या कभी इन बच्चों के बारे में हमने सोचा है या हमारे समाज ने सोचा है कि इन बच्चों का स्कूल जाने का दिल नहीं करता. पाकुड़ जिला के अंदर कई ऐसे परिवार हैं जिन परिवारों का सदस्य सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण बेहतर इलाज नहीं कर पाते और उनकी मौत हो जाती है. इसी समाज के अंदर कई ऐसे लोग भी हैं जो अपनी बेटी की शादी सिर्फ आर्थिक तंगी होने के कारण नहीं कर पाते. इसी समाज में कई ऐसे मां-बाप मिल जाएंगे जिनको देखने वाला कोई नहीं है. ऐसे मजबूर मां-बाप के ऊपर क्या बीतती होगी. ऐसे ही लोगों की कई कहानी हमारे सामने से गुजर जाती है. पर हम सभी समाज के लोग अपने काम में मशगूल, उनकी तरफ निगाह उठाने की भी फुर्सत नहीं मिलती. न जाने समाज के अंदर कितने ऐसे बेसहारा लोग हैं जिनका कोई हाल-चाल पूछने वाला नहीं. ऐसे ही लोगों के दुख दर्द में शामिल होने के लिए मनीरामपुर पंचायत से एक युवाओं की टीम खड़ी हुई है. यह टीम चाहती है कि इस तरह के लोगों का सहयोग किया जाए. इनको भी समाज के अंदर बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए. इन युवाओं ने अपनी इस टीम का नामकरण किया है, यूथ चैरिटी. हाल ही के दिनों में अकीमुद्दीन शेख की देखरेख में इस यूथ चैरिटी का कार्यालय भी मनीरामपुर में खुल चुका है. पाकुड़ जिला में अलग-अलग क्षेत्र के लिए अगर इसी तरह की युवाओं की छोटी-छोटी टीम खड़ी हो जाए तो शायद समाज से दूर रह रहे इन लोगों की जिंदगी आसान हो जाए. हालांकि कई इस तरह की टीम पहले से है और समाज के लोगों को हक और अधिकार देने के लिए वह काम भी कर रहे हैं. इंसानियत फाउंडेशन,लाइफ सेवियरस, राहत फाउंडेशन जैसी कई संस्था इन कामों में जुड़ी हुई है. लेकिन अभी और भी इस तरह की टीम तैयार करने की जरूरत है. कहते हैं देश के युवाओं में वह ताकत होती है जो वे ठान लें दुनिया की कोई भी ताकत उसके मंसूबे को रोक नहीं सकती. इस तरह की टीम या फिर संस्था की हिम्मत बढ़ाने के लिए समाज के प्रभावशील लोगों को आगे बढ़कर इनकी मदद करने की जरूरत है.

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