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May 1, 2026 6:41 am

मजदूरों की बेबसी, मात्र 350 की दिहाड़ी, आखिर कैसे चलेगा परिवार, मजदूर कह रहा है ध्यान दो सरकार

यासिर अराफ़ात

पाकुड़ : आए दिन पाकुड़ रेलवे स्टेशन में मजदूरों का जत्था दूसरे प्रदेशों के लिए रवाना होते हुए आमतौर पर देखे जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया जाता है कि हमारे पाकुड़ जिला के अंदर जो मजदूर मजदूरी करके अपनी रोजी-रोटी की व्यवस्था करते हैं उस मजदूरी राशि में संतुष्टि नहीं मिल पाती है. कारण यह की एक मजदूर को एक दिन की दिहाड़ी सिर्फ ₹350 ही मिल पाती है.अब आप सोच सकते हैं कि एक महीने में एक मजदूर की इनकम कितनी हो जाती है. सबसे बड़ी दिक्कत वाली बात इन मजदूरों की तो यह है कि पूरे महीने के दौरान 20 से 25 दिन ही काम मिल जाता है. यानी कुल मिलाकर अगर देखा जाए की एक मजदूर के लिए अपने क्षेत्र में मजदूरी करके अपना परिवार का खर्चा चलाना बेहद मुश्किल साबित हो जाता है.राजनेता चुनाव के समय इन मजदूरों का वोट जरूर लेते हैं परंतु इन मजदूरों के बारे में कभी नहीं सोचते कि आखिर इन मजदूरों की जो दिहाड़ी राशि है सउस राशि को बढ़ाया भी जाए, जिससे एक मजदूर सम्मानजनक जिंदगी जी सके और अपना परिवार भी चला सके. इन्हीं सब कारण से ज्यादातर मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे प्रदेशों में जाने के लिए विवश हो जाते हैं.सबसे बड़ी बात तो यह है कि पाकुड़ जिला में दिन-ब-दिन मजदूरी वाला काम भी घट रहा है.एक वक्त था जब पत्थर उद्योग की स्थिति काफी अच्छी थी.उस समय पाकुड़ जिला के मजदूर रेलवे ट्रैक में जो मालगाड़ी पत्थरों से लोड की जाती थी वह मजदूरों से ही की जाती थी,जिससे मजदूरों की आमदनी अच्छी खासी हो जाती थी. लेकिन समय का पहिया घूमा और दौर आ गया मशीनों का. मालगाड़ियां अभी भी पत्थरों से लोडिंग की जाती है लेकिन अब मजदूरों से नहीं जेसीबी मशीनों से गाड़ियां लोड होती है. इससे भी मजदूरों की आमदनी पर बहुत बड़ा असर पड़ा. पहले की तुलना में पत्थर उद्योग काफी कमजोर भी हो गया. यानी की कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो पाकुड़ जिला में औद्योगिक कारखाना एक भी न होने के कारण और पत्थर उद्योग की हालत नाजुक होने के कारण यहां के मजदूरों को विवश होकर दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ता है. जरा एक बार सोच कर देखिए,मजदूरों की बेबसी, मात्र 350 की दिहाड़ी, आखिर कैसे चलेगा परिवार, मजदूर कह रहा है ध्यान दो सरकार, करो हमारे ऊपर उपकार, तुम ही तो हो हमारी सरकार, तुम्हें छोड़कर किसके जाए द्वारा.

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