वन नेशन वन इलेक्शन भारत के संविधान में उल्लेखित संघवाद पर हमला है – बृंदा कारात।
सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी को दी गई श्रद्धांजलि।
सीपीएम पाकुड़ विधानसभा सीट को चुनाव लड़ने के लिए चिन्हित कर चुकी है-प्रकाश विप्लव
सतनाम सिंह
पिछले कई दशकों से संताल परगना क्षेत्र में विशेष कर साहेबगंज और पाकुड़ जिले में संघ परिवार के विभिन्न समुहों द्वारा एक सुनियोजित तरीके से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला उछाला जाता रहा है. लेकिन जब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी भारतीय जनता पार्टी ने यह मुद्दा और जोर – शोर से उठाना शुरू कर दिया. झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए नियुक्त किए गए एक प्रभारी असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्व सरमा जो विषवमन के लिए कुख्यात हैं कुछ ज्यादा ही उछल कूद मचा रहे हैं. झारखंड मे होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा इसे एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही. उन्होंने झारखंड में घुसपैठियों की बढ़ती तादाद का हौवा खड़ा करते हुए यहां की डेमोग्राफी (जनसांख्यकि) के बदल जाने की बात उछाल रहे हैं . उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा का कद छोटा हो गया है. साथ ही झारखंड में आदिवासियों के लिए आरक्षित सभी पांच लोकसभा सीटों पर भाजपा हार गयी है.यही नहीं विधानसभा में आदिवासियों के लिए आरक्षित कुल 28 सीटों में से उसे लोकसभा चुनाव में मात्र 5 पर ही बढत मिल सकी. इसलिए भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने अब मनगढ़ंत आंकड़ों का सहारा लेकर कथित घुसपैठ को आदिवासियों से जोड़ कर अपने आकाओं के बेसुरे राग की ही जुगलबंदी कर रहे हैं. पुरे देश के देशभक्त नागरिकों को भाजपा – आरएसएस द्वारा सुनियोजित तरीके से फैलाए जा रहे कथित ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ के नरेटिव के मकड़जाल को समझना जरुरी है. क्योंकि यह एक सोची समझी कार्ययोजना है. जिसका इस्तेमाल सांप्रदायिक धुव्रीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाने और बांग्लाभाषी मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है. अब इसे एक नया नाम ”लैंड जिहाद ” भी दे दिया गया है
यदि प्रमाणित तथ्यों की बात की जाए तो केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार के गृह विभाग के विशेष शाखा ने संताल परगना प्रमंडल के सभी 6 जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को आज से तेरह माह पूर्व एक सर्कुलर भेज कर बांग्लादेश से अवैध रूप से आए घुसपैठियों की तलाश कर उन पर कानूनी कार्रवाई किए जाने का आदेश दिया था. उस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि इस इलाके में जितने भी मदरसे हैं और यहां पर अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित जितने भी शैक्षणिक संस्थान हैं उनकी जांच की जाए, क्योंकि ” घुसपैठियों ” का आधार कार्ड, वोटर कार्ड और भारत का नागरिक होने का प्रमाणपत्र बनाने में इन शैक्षणिक संस्थानों की ही प्रमुख भूमिका है. यह सर्कुलर जारी होने के बाद उपरोक्त 6 जिलों की पुलिस, जिला प्रशासन और इंटिलिजेंस ने सभी मदरसों और निजी शैक्षणिक संस्थानों का स्क्रीनिंग
करने पर यह पाया कि सर्कुलर में उल्लेखित बात कोरी कल्पना पर आधारित है.साथ ही काफी जांच पड़ताल के बाद भी अबतक एक भी घुसपैठिया पुलिस को नहीं मिला है. उल्लेखनीय है कि 3 जुलाई को झारखंड हाई कोर्ट में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें यहां से निकाल बाहर करने की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ” संताल परगना क्षेत्र के सभी उपायुक्त आपसी सामंजस्य से बांग्लादेश की तरफ से आने वाले घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें वापस भेजने के लिए एक कार्ययोजना तैयार कर काम करें.” हाई कोर्ट के दो सदस्यीय बेंच के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण और जस्टिस अरुण कुमार ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह एक शपथ-पत्र के माध्यम से दो सप्ताह के भीतर हाई कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे.
राज्य सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दिया है. जिसमें यहां घुसपैठ के किसी भी घटना से इंकार किया गया है. लेकिन केंद्र सरकार ने बहुत देर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की और बिना किसी प्रमाण के घुसपैठ की केवल आशंका व्यक्त की है. झारखंड में भाजपा के ही नेतृत्व में लंबे समय तक। सरकार रही है लेकिन उनके शासनकाल में भी एक भी घुसपैठिया नहीं पकड़ा गया.
सीपीएम की स्पष्ट समझ है कि यदि बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ हो रही है तो इसे रोकने की पुरी जिम्मेवारी केंद्र सरकार की है. क्योंकि बांग्लादेश से झारखंड की अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं लगती है. बांग्लादेश और भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा 4,096 किलोमीटर लंबी है जो दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी भूमि सीमा है. जो असम में 262 किलोमीटर, त्रिपुरा में 856, मिजोरम में 318, मेघालय में 443 और पश्चिम बंगाल में 2,217 किलोमीटर है. जहां पर भूमि है वहां एक बड़े हिस्से में दोनों देशों के तरफ कंटीले तार के फेस (बाड) लगे हुए हैं. इस अंतर्राष्ट्रीय सीमा की देख रेख सीमा सुरक्षा बल (BSF) जो केंद्रीय बल है के अधीन है. जो लगातार सीमा पर पेट्रोलिंग करते रहते हैं दुसरी ओर बांग्लादेश राइफल्स के जवान तैनात रहते हैं. जल क्षेत्र में गश्ती नौकाओं से बीएसएफ द्वारा बॉर्डर क्षेत्र में पेट्रोलिंग करते हुए कड़ी निगरानी रखी जाती है. यैसे में घुसपैठ आसान नहीं है. लेकिन यदि कोई घुसपैठिया भारत में प्रवेश कर गया है तो उसकी तलाश कर उस पर कानूनी कार्रवाई कर उसे सजा दी जानी चाहिए और सजा काटने के बाद उसे बिना देर किए बांग्लादेश वापस भेज दिया जाना चाहिए. इस पर कोई दो राय नहीं हो सकती है. लेकिन कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे और पाकिस्तान बनने के बाद भी बाइ च्वायस भारतीय नागरिक के रूप में यहां रहने का निर्णय करने वाले सभी बांग्लाभाषी मुसलमानों को घुसपैठिया करार देना सांप्रदायिक राजनीति की साजिश है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
यह बात आज पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के सीपीएम कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीपीएम के नेताओं ने कही
इस मौके पर पार्टी की पोलिट ब्यूरो सदस्य बृंदा कारात राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, सचिवमंडल सदस्य इकबाल, सुरजीत सिन्हा, पाकुड़ और साहेबगंज जिला कमिटियों के सचिव गोपीन सोरेन, असगर आलम।






